अमीन कुरेशी
-टाइम पत्रिका ने मोदी पर लगाया ठप्पा
-क्या बीजेपी और एनडीए को स्वीकार हैं मोदी
-बीजेपी मोदी को प्रधान मंत्री के तौर पर करे पेश
-मुसलमान और सभी को साथ लेकर करे दूसरा प्रयोग
हमारे देश से अग्रेज चले गए लेकिन विलायत का भूत अब तक नहीं उतरा है. विलायती अर्थात विदेश की चीजों से लगाव , फिर चाहे वह किसी पत्रिका में छपा लेख ही क्यों न हो. हाल ही में टाइम पत्रिका ने नरेंद्र मोदी पर एक कवर स्टोरी छापी है. इस लेख को दुनिया की शीर्ष अदालत के फैसले की तरह पेश किया जा रहा है. मोदी को किसी पत्रिका से अधिक देश के लोगों द्वारा स्वीकार करने की कसौटी पर खरा उतरने की ज़रुरत है. यह अलग बात है कि खुद बीजेपी में मोदी को लेकर अलग अलग राय हैं. एन डी ए को मोदी स्वीकार नहीं हैं. पहले बिहार और फिर उ प्र के चुनाव से मोदी को दूर रखा गया. बीजेपी को डर है कि मोदी के नाम से एन डी ए बिखर सकता है और उसके घटक दल तीसरा मोर्चा मज़बूत कर सकते हैं. अकेले बीजेपी को लोकसभा का चुनाव अपने दम पर जीतने की आश उ प्र चुनाव के बाद औए काम हो गयी है. लेकिन बीजेपी को अब दो प्रयोग कर के देख लेना चाहिए. एक तो संघ की इच्छा अनुसार मोदी को प्रधान मंत्री के तौर पर पेश कर अकेले उनके दम पर चुनाव लड़ना चहिये. यदि सफलता न मिले तो अगला चुनाव मुसलमान और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर लड़ के देखना चाहिए. सफलता मिल सकती है.
टाइम पत्रिका का मानना है कि नरेंद्र मोदी ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चुनौती दे सकते हैं. टाइम ने अपने ताजा अंक में नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में खूब कसीदे काढ़े हैं. टाइम ने कहा है कि 2014 के आम चुनावों में अभी दो साल बचे हैं, जिसके बीच कांग्रेस उम्मीद कर रही है कि सोनिया के पुत्र राहुल पार्टी में नई जान फूंकेंगे, लेकिन हाल के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद वो कमजोर नजर आ रहे हैं.
टाइम पत्रिका के नये अंक में आवरण पर नरेन्द्र मोदी की गंभीर मुद्रा वाली एक बड़ी तस्वीर छापी गई है, जिसके साथ शीर्षक लिखा गया है- मोदी के इरादे पक्के हैं. लेकिन क्या वो भारत का नेतृत्व कर सकते हैं?
टाइम की संवाददाता ज्योति थोटम के एक लेख में कहा गया है कि इकसठ साल के मोदी शायद एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो अपनी पिछली उपलब्धियाँ और व्यापक पहचान के बल पर राहुल को चुनौती दे सकते हैं.
गुजरात दंगों को लेकर कहा गया है कि इस संदर्भ में मोदी का नाम मात्र लिए जाने से, जिनका नाम अमिट तौर पर साल 2002 के गुजरात दंगो से जुड़ा है, भारत का एक वर्ग वितृष्णा से भर उठता है. उन्हें देश का नेता चुने जाने का मतलब होगा भारत का राजनीतिक क्षेत्र में धर्मनिरपेक्षता के आदर्श का त्याग करना.
लेकिन टाइम इन सब के बाद भी मोदी को विकास पुरुष की श्रेणी में खड़े करने से परहेज नहीं करता. पत्रिका के अनुसार- एक वर्ग जब किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचता है जो देश को भ्रष्टाचार के दलदल और निकम्मेपन के शाप से उबार सकता है, जो दृढ़ निश्चय और काम से काम रखने वाला एक ऐसा नेता हो जो देश को विकास की उस राह पर अग्रसर कर सके जहां वो चीन की बराबरी कर सकता है तो मोदी का नाम सामने आता है.
कांग्रेस ने टाइम पत्रिका और बुक्रलिन संस्थान द्वारा प्रकाशित लेखों में मोदी की प्रशंसा की आलोचना करते हुए कहा कि इन लेखों में गुजरात के विकास से जुड़े झूठे तथ्यों को शामिल किया गया है। पत्रकारिता और रिपोर्टिंग संतुलित और निष्पक्ष होनी चाहिए। इनमें सिर्फ उन्हीं लोगों के कथन क्यों शामिल किए गए जिन्होंने मोदी की तारीफ की। ये लेख पक्षपातपूर्ण हैं और इसलिए ये गुजरात और देश के लोगों के साथ नाइंसाफी है। कांग्रेस की टिप्पणी में कहा गया कि इस पत्रिका में ओसामा बिन लाडेन और ईराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन के बारे में भी छप चुका है।
मोदी पर छापे जाने का विरोध विदेशों में भी जारी है। इंडियन अमेरिकेन मुस्लिम कौंसिल (आईएएमसी) का आरोप है कि गुजरात के सीएम को मैगजीन के कवर पेज पर जगह दिलाने के लिए वॉशिंग्टन की एक पीआर एजेंसी का सहारा लिया गया है। यह संगठन मोदी को टाइम के कवर पेज पर जगह मिलने के खिलाफ है और दुनियाभर में इसके खिलाफ अभियान चला रहा है।
आईएएमसी का आरोप है कि वॉशिंग्टन की पीआर एजेन्सी एपीसीओ वर्ल्डवाइड के प्रयासों से ही ‘टाईम’ में मोदी की वाहवाही हुई है। अमेरिका ने अभी तक नरेन्द्र मोदी को वीजा नहीं दिया है और हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस ने मोदी की आलोचना की थी, ऐसे वक्त में ‘टाईम’ में मोदी की प्रशंसा की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है।
आईएएमसी का कहना है, 'टाइम की कवर स्टोरी में कई गलत और झूठी बातें प्रकाशित हुई हैं। इसमें बतौर सीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की कई गलतियों को छिपाने की कोशिश की गई है।'
गुजरात सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य की छवि को बेहतर बनाने के लिये एपीसीओ वर्ल्ड वाइड की सेवा ली है। यह एजेंसी अमेरिका की दूसरे नंबर की सबसे पावरफुल पीआर एजेंसी है। गुजरात में विपक्ष के नेता शक्ति सिंह गोहिल ने आरोप लगाया है कि गुजरात के लोगों के पैसे से ‘टाइम’ में मोदी की खबर छपी है। यह पीआर एजेंसीअमेरिका का मशहूर लॉबिइंग फर्म है। इसके सदस्यों में अमेरिका के पूर्व सीनेटर और राजदूत शामिल हैं। इसके क्लाइन्ट में मलेशिया सरकार, रूस के पूर्व कम्युनिस्ट नेता मिखाईल खोद्रोवस्की जैसी हस्तियां हैं।
एपीसीओ वर्ल्ड वाइड जैसी लॉबिइंग फर्म बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करती है. टाइम की कवर स्टोरी से मोदी पर फिर उँगलियाँ उठने लगीं हैं.
-टाइम पत्रिका ने मोदी पर लगाया ठप्पा
-क्या बीजेपी और एनडीए को स्वीकार हैं मोदी
-बीजेपी मोदी को प्रधान मंत्री के तौर पर करे पेश
-मुसलमान और सभी को साथ लेकर करे दूसरा प्रयोग
हमारे देश से अग्रेज चले गए लेकिन विलायत का भूत अब तक नहीं उतरा है. विलायती अर्थात विदेश की चीजों से लगाव , फिर चाहे वह किसी पत्रिका में छपा लेख ही क्यों न हो. हाल ही में टाइम पत्रिका ने नरेंद्र मोदी पर एक कवर स्टोरी छापी है. इस लेख को दुनिया की शीर्ष अदालत के फैसले की तरह पेश किया जा रहा है. मोदी को किसी पत्रिका से अधिक देश के लोगों द्वारा स्वीकार करने की कसौटी पर खरा उतरने की ज़रुरत है. यह अलग बात है कि खुद बीजेपी में मोदी को लेकर अलग अलग राय हैं. एन डी ए को मोदी स्वीकार नहीं हैं. पहले बिहार और फिर उ प्र के चुनाव से मोदी को दूर रखा गया. बीजेपी को डर है कि मोदी के नाम से एन डी ए बिखर सकता है और उसके घटक दल तीसरा मोर्चा मज़बूत कर सकते हैं. अकेले बीजेपी को लोकसभा का चुनाव अपने दम पर जीतने की आश उ प्र चुनाव के बाद औए काम हो गयी है. लेकिन बीजेपी को अब दो प्रयोग कर के देख लेना चाहिए. एक तो संघ की इच्छा अनुसार मोदी को प्रधान मंत्री के तौर पर पेश कर अकेले उनके दम पर चुनाव लड़ना चहिये. यदि सफलता न मिले तो अगला चुनाव मुसलमान और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर लड़ के देखना चाहिए. सफलता मिल सकती है.
टाइम पत्रिका का मानना है कि नरेंद्र मोदी ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चुनौती दे सकते हैं. टाइम ने अपने ताजा अंक में नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में खूब कसीदे काढ़े हैं. टाइम ने कहा है कि 2014 के आम चुनावों में अभी दो साल बचे हैं, जिसके बीच कांग्रेस उम्मीद कर रही है कि सोनिया के पुत्र राहुल पार्टी में नई जान फूंकेंगे, लेकिन हाल के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद वो कमजोर नजर आ रहे हैं.
टाइम पत्रिका के नये अंक में आवरण पर नरेन्द्र मोदी की गंभीर मुद्रा वाली एक बड़ी तस्वीर छापी गई है, जिसके साथ शीर्षक लिखा गया है- मोदी के इरादे पक्के हैं. लेकिन क्या वो भारत का नेतृत्व कर सकते हैं?
टाइम की संवाददाता ज्योति थोटम के एक लेख में कहा गया है कि इकसठ साल के मोदी शायद एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो अपनी पिछली उपलब्धियाँ और व्यापक पहचान के बल पर राहुल को चुनौती दे सकते हैं.
गुजरात दंगों को लेकर कहा गया है कि इस संदर्भ में मोदी का नाम मात्र लिए जाने से, जिनका नाम अमिट तौर पर साल 2002 के गुजरात दंगो से जुड़ा है, भारत का एक वर्ग वितृष्णा से भर उठता है. उन्हें देश का नेता चुने जाने का मतलब होगा भारत का राजनीतिक क्षेत्र में धर्मनिरपेक्षता के आदर्श का त्याग करना.
लेकिन टाइम इन सब के बाद भी मोदी को विकास पुरुष की श्रेणी में खड़े करने से परहेज नहीं करता. पत्रिका के अनुसार- एक वर्ग जब किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचता है जो देश को भ्रष्टाचार के दलदल और निकम्मेपन के शाप से उबार सकता है, जो दृढ़ निश्चय और काम से काम रखने वाला एक ऐसा नेता हो जो देश को विकास की उस राह पर अग्रसर कर सके जहां वो चीन की बराबरी कर सकता है तो मोदी का नाम सामने आता है.
कांग्रेस ने टाइम पत्रिका और बुक्रलिन संस्थान द्वारा प्रकाशित लेखों में मोदी की प्रशंसा की आलोचना करते हुए कहा कि इन लेखों में गुजरात के विकास से जुड़े झूठे तथ्यों को शामिल किया गया है। पत्रकारिता और रिपोर्टिंग संतुलित और निष्पक्ष होनी चाहिए। इनमें सिर्फ उन्हीं लोगों के कथन क्यों शामिल किए गए जिन्होंने मोदी की तारीफ की। ये लेख पक्षपातपूर्ण हैं और इसलिए ये गुजरात और देश के लोगों के साथ नाइंसाफी है। कांग्रेस की टिप्पणी में कहा गया कि इस पत्रिका में ओसामा बिन लाडेन और ईराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन के बारे में भी छप चुका है।
मोदी पर छापे जाने का विरोध विदेशों में भी जारी है। इंडियन अमेरिकेन मुस्लिम कौंसिल (आईएएमसी) का आरोप है कि गुजरात के सीएम को मैगजीन के कवर पेज पर जगह दिलाने के लिए वॉशिंग्टन की एक पीआर एजेंसी का सहारा लिया गया है। यह संगठन मोदी को टाइम के कवर पेज पर जगह मिलने के खिलाफ है और दुनियाभर में इसके खिलाफ अभियान चला रहा है।
आईएएमसी का आरोप है कि वॉशिंग्टन की पीआर एजेन्सी एपीसीओ वर्ल्डवाइड के प्रयासों से ही ‘टाईम’ में मोदी की वाहवाही हुई है। अमेरिका ने अभी तक नरेन्द्र मोदी को वीजा नहीं दिया है और हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस ने मोदी की आलोचना की थी, ऐसे वक्त में ‘टाईम’ में मोदी की प्रशंसा की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है।
आईएएमसी का कहना है, 'टाइम की कवर स्टोरी में कई गलत और झूठी बातें प्रकाशित हुई हैं। इसमें बतौर सीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की कई गलतियों को छिपाने की कोशिश की गई है।'
गुजरात सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य की छवि को बेहतर बनाने के लिये एपीसीओ वर्ल्ड वाइड की सेवा ली है। यह एजेंसी अमेरिका की दूसरे नंबर की सबसे पावरफुल पीआर एजेंसी है। गुजरात में विपक्ष के नेता शक्ति सिंह गोहिल ने आरोप लगाया है कि गुजरात के लोगों के पैसे से ‘टाइम’ में मोदी की खबर छपी है। यह पीआर एजेंसीअमेरिका का मशहूर लॉबिइंग फर्म है। इसके सदस्यों में अमेरिका के पूर्व सीनेटर और राजदूत शामिल हैं। इसके क्लाइन्ट में मलेशिया सरकार, रूस के पूर्व कम्युनिस्ट नेता मिखाईल खोद्रोवस्की जैसी हस्तियां हैं।
एपीसीओ वर्ल्ड वाइड जैसी लॉबिइंग फर्म बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करती है. टाइम की कवर स्टोरी से मोदी पर फिर उँगलियाँ उठने लगीं हैं.