Friday, 6 May 2016

मुसलमानों का एजेंडा सिर्फ शिक्षा हो

-आबादी में १५ % हैं मुस्लमान.
-२५ % बच्चे स्कूल नहीं जाते.
-ड्राप आउट रेट सबसे अधिक.
-आई आई टी में सिर्फ १%
-ग्रेजुएशन की दर मात्र ३%
- सरकारी नौकरी में २.३%

भारत में शिक्षा के विकास के प्रतीक भारत रत्‍‌न मौलाना अबुल कलाम आजाद कलाम का जन्मदिन रविवार को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया गया। देशभर के मुस्लिम शिक्षा संस्थानों में हुए समारोह में एक बार फिर मुसलमानों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक दशा और दिशा पर चिंतन मनन हुआ. इसका निचोड़ यह निकला कि मुसलमानों में शिक्षा और रोज़गार की ज़रुरत है. कई और सर सय्यद , मौलाना अबुल कलाम आजाद और गुलाम वस्तान्वी जैसे शिक्षाविदों की ज़रुरत है. शिक्षा आयेगी तो रोज़गार-कारोबार आयेगा, रोज़गार और कारोबार से सम्पन्नता आयेगी.
भारतीय मुसलमानों की अगर देश के अन्य समुदायों से तुलना करें तो देखेंगे कि वे उनसे पीछे हैं. आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सभी तरह से. तीनों हालात में वे भारत की उन जातियों से भी पीछे हैं, जो अल्पसंख्यक कहलाती हैं. आज़ादी के समय सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की संख्या ३१ प्रतिशत थी जो अब २.३ प्रतिशत रह गयी है. इन 63 सालों के दौरान एक विशेष लक्ष्य के तहत अधिकारों से वंचित रखा गया. नतीजा यह हुआ कि मुस्लमान अनुसूचित जनजाति से नीचे चले गए और भारत का मुसलमान यह मांग करने पर मजबूर हो गया है कि उसे आरक्षण मिलना चाहिए.
मुस्लिम समाज आजादी के 63 साल बाद भी क्यों पिछडा रह गया और सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति के क्षेत्र में लगातार पिछडने के क्या कारण है।मुस्लिम समाज के लोग बहुतायत में हाथ के हुनर का काम जानते है, चाहे चूडी बनाने का काम हो , बुनाई व हस्तशिल्प की कारीगरी हो , जैम्स एण्ड ज्वैलरी को चमकाने की कला हो और चाहे लकड़ी एवं लोहे के खिलौने बनाने की दस्तकारी हो हर क्षेत्र में मुस्लिम समाज अपनी कारिगरी के माध्यम से देश के उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन विषेषकर दो समस्याओं के कारण अपने उत्पादन की क्षमता को बनाये रखने में असफल रहते है एक समस्या विपणन (मार्केटिंग) की है और दूसरी समस्या बैंक ऋण (क्रेडिट) की है यदि इन दोनो समस्याओ का समाधान हो जाये तो मुस्लिम समाज को तरक्की से कोई नहीं रोक सकता।
दूसरी समस्या उत्पादन की प्रक्रिया में आवश्यकता पडने पर बैंक से कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होने से संबंधित है । बैंको द्वारा बिना गांरटी के लोन नहीं दिया जाता है और मुस्लिम समाज के आर्थिक दृष्टि से कमजोर कारीगरों के पास गांरटी देने के लिए कोई संपत्ति भी नहीं होती और इनको ऋण की मांग भी प्रायः एक लाख से कम ही होती है। ऐसी स्थिति में गांरटी की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। और बैंको को स्पष्ट हिदायत दी जानी चाहिए कि ऋण के लिए आवेदन पत्र प्राप्त होने पर निश्चित समय सीमा में मुस्लिम कारीगरों को ऋण उपलब्ध हो सकें। इस समस्याओ का समाधान होने से मुस्लिम समाज आर्थिक व सामाजिक उन्नति की सीढी चढ़ सकता है।मुस्लिम समाज में आयोजित होने वाले सामुहिक विवाहों मे अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा आर्थिक सहायता दिये जाने, मदरसों में कम्प्यूटर व अंग्रेजी शिक्षा की समूचित व्यवस्था करने , सभी राज्यों मे आजीविका मिशन प्रारम्भ करने , सांसद निधि कोष से एक निश्चित प्रतिशत राशि मुस्लिम समाज के मौहल्लों में खर्च की जानी चाहिए.
शिक्षा के मामले में मुस्लिम औरतों की स्थिति सबसे बदतर है।भारत की पहली महिला शासक रज़िया सुल्तान, पहली महिला न्यायाधीश बी फातिमा , राजनेता मोहसिना किदवई , नजमा हेपतुल्लाह , समाजसेविका -अभिनेत्री शबाना आज़मी, सौन्दर्य की महारती शहनाज़ हुसैन, नाट्यकर्मी नादिरा बब्बर, पूर्व महिला हाकी कप्तान रजिया जैदी, टेनिस सितारा सानिया मिर्जा, गायन में -बेगम अख्तर, परवीन , साहित्य-अदब में नासिर शर्मा, मेहरून निसा परवेज़, इस्मत चुगताई, कुर्रतुल ऍन हैदर तो पत्रकारिता में सादिया देहलवी और सीमा मुस्तफा जैसे कुछ और नाम लिए जा सकते हैं, जो इस बात के साक्ष्य हो ही सकते हैं की यदि इन औरतों को भी उचित अवसर मिले तो वो भी देश-समाज की तरक्की में उचित भागीदारी निभा सकती हैं। लेकिन सच तो यह है कि फातिमा बी या सानिया या मोहसिना जैसी महिलाओं का प्रतिशत बमुश्किल एक भी नहीं है। अनगिनत शाहबानो, अमीना और कनीज़ अँधेरी सुरंग में रास्ता तलाश कर रही हैं।
भारत में महिलाओं की साक्षरता दर 40 प्रतिशत है,इसमें मुस्लिम महिला मात्र 11 प्रतिशत है। हाई स्कूल तक शिक्षा प्राप्त करने वाली इन महिलाओं का प्रतिशत मात्र 2 है और स्नातक तक का प्रतिशत 0.81 है. मुस्लिम संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर मुस्लिम लड़कों का अनुपात 56.5 फीसदी है, छात्राओं का अनुपात महज़ 40 प्रतिशत है। इसी तरह मिडिल स्कूलों में छात्रों का अनुपात 52.3 है तो छात्राओं का 30 प्रतिशत है।
पैगम्बर हज़रत मोहम्मद ने कहा था की अगर शिक्षा लेने के लिए समुद्र पार और चीन भी जाना पड़े तो जाएँ. आपने गर्ल्स एजुकेशन के सम्बन्ध में कहा था की तुमने अगर एक मर्द को पढाया तो मात्र एक व्यक्ति को पढ़ाया। लेकिन अगर एक औरत को पढाया तो एक खानदान को और एक नस्ल को पढ़ाया। लेकिन समाज ने इस पर अमल नहीं किया और उसका नतीजा सामने है.
भारतीय मुसलमानों का स्वभाव दुर्भाग्य से भावनात्मक है. इस कारण राजनीतिक पार्टियों लंबे समय से समाज का शोषण कर रहीं हैं. समाज के अधिकांश लोग विकास के बजाय भावनात्मक मुद्दों को वरीयता देते हैं. मुसलमान अगर भावना से ऊपर उठकर शिक्षा को अपना एक एजेंडाबना लें तो मुसलमानों का शोषण बंद हो सकता है. फिर मुसलमान अपनी लडाई खुद लड़ सकता है. और अधिकारों की यह लडाई एक मुसलमान नहीं बल्कि एक भारतीय की तरह होनी चाहिए.
दु:खी पारिवारिक जीवन के रहस्य 
 
आज मेरे यार की शादी है...। बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है...। शादी में बैंड बजाने वाले अक्सर इस तरह के गाने बजाते हैं और बाद में बेचारे एक पति 
का जिंदगीभर बैंड बजता रहता है। तो क्या पुरुष को शादी नहीं करनी चाहिये या एक पुरुष शादी के बिना अधूरा है। यह बात अलग है कि शादी के बाद वह और भी 
आधा अधूरा हो जाता है।

स्वर्ग से उतरी अप्सरा-
शादी को लेकर कई तरह की सही और गलतफहमी है। एक तो यह कि शादियां स्वर्ग में तय होती हैं। यह अलग बात है कि जमीन पर उसके झटके लगते हैं। 

दिल चाहता है-
आंखों आंखों में प्यार की शुरुवात के बाद हद से गुजर जाने की चाहत में शादी से पहले प्रेमी पूरी रात इंतजार करता है कि प्रेमिका कुछ कहे। शादी के बाद पत्नी के कुछ 
कहने से पहले ही पति 'लुढ़क' जाता है। 

पलंगतोड़ खर्राटे-
कई बार यह झटके रातभर पलंग पर भी लगते हैं जब पलंगवाली रातभर खरार्टे लेती है। इससे एक फायदा जरूर होता है। यदि आप चाहते हैं कि आपकी बीवी 
आपकी बात ध्यान से सुने तो उससे रात में उस समय बात कीजिए जब वह खरार्टे ले रही हो। 

कोयल सी तेरी बोली-
प्यार-मोहब्बत के दिनों में जिसकी आवाज कोयल की आवाज की तरह मधुर लगती थी वही शादी के बाद चील की तरह चीखती है। शादी के बाद प्रेमी भी तो तौते 
की तरह आंख फेर लेता है और कौवे की कांव कांव करने लगता है। ऐसे में पहले साल में पति बोलता है और पत्नी सुनती है। दूसरे साल में पत्नी बोलती है और
 पति सुनता है। तीसरे साल में दोनों एक दूसरे की नहीं सुनते हैं। चौथे साल से दोनों बोलते हैं और पड़ोसी सुनते हैं।

बहुमुखी बहू-
जब तक शादी नहीं होती है तब तक प्रेमिका चंद्रमुखी होती है। शादी होते ही वह सूरजमुखी हो जाती है और कुछ दिनों बाद ही ज्वालामुखी हो जाती है।

मैन इस मैन-
जब तक शादी नहीं होती तब तक प्रेमी सुपरमैन होता है। शादी होते ही वह जेंटिलमैन हो जाता है। शादी के कुछ सालों बाद वह बेचारा वाचमैन बन कर रह जाता है।

सुस्वागतम्-
पारिवारिक जीवन में कई अलिखित नियम होते हैं। जैसे पति शाम को दफ्तर से लौटता है तो दरवाजा पत्नी खोलती है। लेकिन कार के  मामले में उलटा होता है। 
यदि पति अपनी पत्नी के लिए कार का दरवाजा खोले तो दो बातें हो सकती हैं। या तो कार नई है या पत्नी। दोनों पुरानी होने पर यह झंझट नहीं होती है। 

अटूट बंधन-
शादी से पहले प्रेमी-प्रेमिका युगल होते हैं। शादी के बाद कपल हो जाते हैं। इनमें से कई तो जिंदगीभर आसतीन की कफलिंग की तरह जुड़े रहते हैं और कई का 
कपलिंग टूट जाता है और इंजिन से डिब्बा अलग हो जाता है।

घरवाली बाहरवाली-
निश्चित ही शादी सुखद होती है लेकिन मिजाज का रंगीलापन जीवन के रंग को भंग कर देता है। 

पर्सनल लॉ-
प्रत्येक पति चाहता है कि उसकी बीवी सुंदर, समझदार, कम खचीर्ली और अच्छा खाना पकाने वाली हो लेकिन दिक्कत यह है कि कानून सिर्फ एक ही शादी की 
अनुमति देता है। 

रासायनिक हथियार-
कहते हैं प्यार में केमिस्ट्री काम करती है इसीलिए शादी के बाद पत्नी बात बात पर पति को रासायनिक हथियार(जहर) से धमकाती है। 

शादी के लड्डू -
फिर भी शादी वह लड्डू है जो खाए पछताए और जो न खाए वह भी पछताए। इसलिए खा कर पछताना ही बेहतर है।
एंग्लो इंडियन

तबियत लूज़ होने के कारण डॉक साब ने सुबह सुबह मार्निग वॉक करने की सलाह दी है। इसलिए मैं सुबह अर्ली मॉर्निग उठ जाता हूं। 
कई बार स्लीप में नींद नहीं खुलती है। इसलिए आलाराम लगा लेता हूं। दांतों का टूथ ब्रश खराब होने के कारण मैंने कई दिनों से बुुरुस नहीं
किया है। इसलिए आज भी मैं बिस्तर पर ही बेड टी पी कर निकल जाऊंगा। डाक साब ने फल फ्रूट खाने को भी कहा है। इसलिए जब मैं
लौटकर रिटर्न आऊंगा तो रिलेक्स हो कर तसल्ली से खाऊंगा। तब तक रेल गाड़ी से मेरा फ्रेंडली फ्रेंड भी आ जाएगा। आज मेरा मन
टहलकर वॉक करने के बजाए क्रिकेट खेलने का है। इसलिए आज मैं बेट बल्ला लेकर जाऊंगा। हमारे खेल के मैदान में एक नेता 
भी आते है। उन्हें कफ के कारण खासी बहुत आती है लेकिन उनकी नैतिकता का मोरल बहुत हाई है। वे पिछले साल गलती से मिस्टेक 
कर बैठे थे जब उन्होेंने दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। किस्मत से उनका बेड लक ही खराब है। अब जीते तो दस दिन की
लांग लीव पर छुट्टी जाना पड़ा। इधर कई नेताओं अपनी शिकायत राइटिंग में लिख कर देने को तैयार थे। रात में नाइट स्टे कर उन्हें
सुलझाना पड़ा। अब सब कुछ शांति से पीसफुली चल रहा है।
खुल्ला खा दी नंगा न्हा

बहती गंगा में अब तक इतने लोग हाथ धो चुके हैं कि अब सफाई की जरूरत पड़ गई है। सफाई में भी कु छ लोग हाथ की सफाई बता देंगे। 
जल-थल की सफाई के साथ देश में दिमागी सफाई और खीसे की सफाई की आपात जरूरत है। दीमागी सफाई उन लोगों की जिनके दिमाग
में कई तरह के वाद का मवाद भरा हुआ है। मवाद की बदबू बिना नहाए नेताओं से अचानक आने लगी है। साथ ही कई प्रांतों से आने वाली
अलग-अलग तरह की बदबू ने देशा को दुनिया के सामने दूषित कर दिया है। जैसे मुम्बई से प्रांतवाद की, यूपी से जातिवाद 
की, गुजरात से संप्रदायवाद की, छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद की, कश्मीर से आतंकवाद की और दक्षिण से भाषावाद की। 
अब आइये खीसे की सफाई पर। खीसे की सफाई उन लोगों की जिन्होेंने काली कमाई से शहर की पॉश कॉलोनी में मातृकृपा, पितृछाया 
और गुरुआशीष बना कर मां-बाप को और गुरु को कलंकित किया है। पता नहीं कौन से गुरुकुल में जेब गरम करने का तवा रखा है
जो इन लोगों का रोटी सेंकना बंद नही हो रहा है। वास्तव में ऐसे लोगों अपने मकानों के नाम घूसकृपा, भ्रष्टभवन, कमिशनकुंज रखना 
चाहिए। इनके बच्चों के नाम रिश्वतलाल और कुमारी करप्शन हों तो भविष्य में काम निकलवाने में आसानी होगी। इनका दफ्तर उस 
ढाबे की तरह होगा जिस पर लिखा होता है खुल्ला खा दी नंगा न्हा।
किसी का शक्तिकरण, किसी का तुष्टिकरण, किसी का सुस्तीकरण और किसी का पुष्टिकरण

हमारे देश में धर्म, जाति, भाषा, प्रांत ... और न जाने किन किन के आधार पर भेदभाव की शिकायत कई लोगों को है। किसी का तुष्टिकरण, 
किसी का सुस्तीकरण तो किसी का पुष्टिकरण। और अब महिला सशक्तिकरण। कुछ राजनीतिक दलों के नेता 
दिखावे के लिए इस बात से सहमत हैं कि महिलाओं को राजनीतिक के शीर्ष मंच पर 33 प्रतिशत स्थान दिए जाएं। इसके लिए
वुमंस रिजर्वेशन बिल कई दिनों से बिल में पड़ा है। इसके तहत लोकसभा और विधानसभा की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी। 
पंचायतों, नगर पालिकाओं और महानगर पालिकाओं में पहले से ही 33 प्रतिशत रिजर्वेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने रिजर्वेशन 
के प्रतिशत में इजाफे का एलान किया है। इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की घोषणा अशोक चव्हाण ने मुख्यमंत्री रहते की गई थी। 
भविष्य में स्त्री-पुरुषों के अनुपात में कमी और आरक्षण 50 से भी बढ़ाने की मांग की गई तो एक दिन शतप्रतिशत महिलाओं को 
आरक्षण होगा तो पुरुष क्या करेंगे? सभी जगह महिला राज कायम होने के बाद फिर पुरुषों की तरफ से महिलाओं से आरक्षण की 
मांग करेंगे। सौ फीसदी महिला आरक्षण के बाद अजीबो-गरीब बदलाव दिखेंगे। 

नारी कंकाल मिले-
स्त्री सत्ता के कायम होने के बाद समाचार पत्रों में पुरुष प्रधान शब्दावली को भी बदला जाएगा। तब यदि कोई निठारी 
जैसा कांड होगा तो अखबार की हेडलाइन इस तरह से होगी- निठारी में नारी कंकाल मिले। 

बाप का नाम ऐच्छिक-
बच्चों के नाम के बाद हर जगह मां का नाम लिखना अनिवार्य होगा। सरकारी आवेदनों में किसी एक कोने में एक कालम होगा 
जहां बाप का नाम लिखा जाना ऐच्छिक होगा। 

पिचक जाएंगी पिचकारियां-
होली पर रंग की पिचकारियां मारने का काम महिलाएं करेंगी और पुरुषों की पिचकारियां हमेशा के लिए पिचक जाएंगी।

हैंडसम और माचो सेक्रे टरी-
दफ्तरों में सभी जगह महिला बॉस होंगी। हैंडसम और माचो टाइप के युवा सेक्रे टरी होंगे। पुष्पगुच्छ या गुलाब देने पर प्रतिबंध होगा। 
महिलाएं गोभी का फूल दे कर पुरुषों को फ्लर्ट करेंगी। यह फल गृहणों को किचन में काम आएगा। 

पुरुषों के लिए रिजर्व-
महानगरों कुछ लोकल मेल स्पेशल होंगी। बकी ट्रेनों में कुछ डिब्बे पुरुषों के लिए रिजर्व होंगे। मेल ट्रेन मे कूपे की छह बर्थ
पुरुषों के लिए रिजर्व होंगी। 

धर्म की ठेकेदारनी -
पूजा,अर्चना और इबादत करवाकर वे भी धर्म की ठेकेदारनी कहलाएंगी। फिलहाल उन्हें इस अधिकार से वंचित रखा
गया है। देवदासियों की जगह देवदास होंगे। 

बाप और भाई की गालियां-
सभी पुलिस स्टेशन महिलाओं के कब्जे में होंगे और पुरुषों की सुनवाई करने के लिए अलग से पुलिस स्टेशन होंगे।
रफटफ दिखने वाली पुलिसवालियां पुरुषों को जो गालियां देंगी उनमें कुत्ता, कमीना जैसे शब्द सामान्य होंगे। 
तेरी मां की... तेरी बहन की... जैसी गालियों में से मां-बहन के नाम की जगह बाप और भाई के नाम जुड़ जाएंगे। 
जो गालियां दी जाएंगी उन्हें यहां लिखना संभव नहीं है। 

बहू की जगह बहूरूपिया-
किन्नर शब्द डिक्शनरी से हटा दिया जाएगा। ऐसे लोगों को पूरी तरह से स्त्री मान लिया जाएगा। 
भ्रूण जल परीक्षण में लड़का होने पर अबोर्शन करा दिया जाएगा।
घर परिवार में लड़की के पैदा होने पर लड्डू बांटे जाएंगे। जाहिर है घर की मुखिया भी महिला होगी। लड़कों की जगह लड़कियों की 
बारात जाएगी। बहू की जगह बहूरूपिया ब्याह कर लाया जाएगा। डोली की जगह डोला होगा। 

राष्ट्रपति की जगह राष्ट्रपत्नी-
संवैधानिक पदों के नाम भी नए सिरे से लिखे जाएंगे। राज्यपाल को राज्यपालिनी के नाम से पुकारा जाएगा 
और राष्ट्रपति की जगह राष्ट्रपत्नी लिखा जाएगा।
सांड कंपनी के संडियार
कारोबारी दुनिया में हर किसी की तमन्ना दौलत कमा कर फोर्ब्स की सूचि में पहला स्थान पाने की होती है। कई कंपनियां बनती हैं, बिगड़ती हैं। अगर राजनीतिक तिकड़म और गॉड फादर हो तो दिन दूने, रात चौगुनी होती है। फिर कोई सेक्टर बाकी नहीं होता जिस पर कंपनी कब्जा जमाना नहीं चाहती। एक के बाद एक इनिशियल पब्लिक ऑफर ( आईपीओ ) बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज में रजिस्टर होने लगते हैं। उनकी पूरी मंशा पूरे बाजार का दोहन या निवेशकों के खीसे से पाई पाई झटकने की होती है। होली के इस रंगारंग फेस्टिवल पर बनी सांड नामक कंपनी के कई शेयर बाजार में आए हैं। निवेशक अपनी पसंद के शेयर खरीद सकते हैं। नाम कुछ इसतरह से हैं।

सांड बिजली
सांड खुजली

इन शब्दों का आशय तो निवेशक समझ ही गए होंगे। सुविधा के लिए फिर भी खुलासा कर देते हैं। कंपनी ने बिजली के बिलों से देशभर के ग्राहकों को जो झटके दिए थे उससे कंपनी का खजाना भर गया है। अब बिजनेस के विस्तार की खुजली होने लगी है। इसलिए कंपनी ने फार्मा सेक्टर पर कब्जा करने के लिए सांड खुजली नामक आईपीओ लाने का फैसला किया। और लीजिए सांड खुजली के शेयर ओवरसब्सक्रायीब हो गए हैं। अब जल्द ही खुजली मिटाने वाली क्रीम बाजार में आने वाली है। इससे कई तरह की खुजली मिट सकती है। जैसे शेयर में पैसा गवानें की खुजली, सांड की पैसा कमाने की खुजली, राजनीती की खुजली, जातिवाद की खुजली, प्रांतवाद की खुजली, भाषावाद की खुजली और आतंकवाद की खुजली। इनको खुजाते- खुजाते देश लहूलुहान हो गया है। अब इंटेंसिव केयर की ज़रुरत है।

इस समस्याओं के समाधान के बाद अब कंपनी खेल-कूद से लेकर राष्ट्र निर्माण के कई आईपीओ लाना चाहती है।

सांड कबड्डी
सांड चड्डी
सांड बॉडी
सांड बड्डी
 
सांड चड्डी नाम से गारमेंट कबड्डी खेलने और बॉडी बिल्डिंग में उपयोगी होंगे। सांड बड्डी यह आईपीओ उन लोगों के लिए होगा जो सांड में अटूट विश्वास रखते हैं। जिन्हें पैसा काटता है। उनकी छटपटाहट पैसा सांड के हवाले करने की होती है। सांड कंपनी कोई भी आईपीओ लाए बड्डी आंख बंद कर उसमें पैसा झोंक देते हैं।

कई सेक्टर में निवेशकों को बर्बाद करने के बाद अब तीन और आईपीओ बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज में रजिस्टर करवाए हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं 

सांड पॉवर
सांड टॉवर
सांड शॉवर

सांड पॉवर ऊर्जा सेक्टर में नए शोध करना चाहती है। इसी के साथ ड्रोन से मोबाइल टॉवर लटकाए जाएंगे जो मंगल पर भी सेल फोन के सिग्नल प्रदान करेंगे। नदियों को जोड़ने के लिए कंपनी ने सांड शॉवर नाम से शेयर बाजार में जारी किए हैं। 

इसके बाद कंपनी भविष्य में कई और आईपीओ लाने वाली है।

सांड फर्नीचर; स्कूल और दफ्तरों में टेबल कुर्सी सप्लाई के लिए। 
सांड  फ्रैक्चर; अस्पताल सेवा के लिए। 
सांड  ट्रैक्टर;  कृषि मशीनरी के बिजनेस लिए।
सांड जनरेटर; माल जनरेट करने के लिए।

सांड जनरेटर नाम का आईपीओ उन लोगों के लिए होगा जो गरीबी रेखा के नीचे हैं। कड़के हैं लेकिन बाजार में मुंह मारने के लिए उनकी लार टपकती है और वे अठन्नी चवन्नी लगा कर लखपति बनने का सपना देखते हैं।
लाठी लाठी पर लिखा है खाने वाले का नाम 
बहुत पुरानी कहावत है-जिसकी लाठी उसकी भैंस। भैंस तो पानी में चली गई बची सिर्फ लाठी बची है जिसे देशभर में खूब 
भांजी जा रही है। 

सत्ता की लाठी-
यह लाठी अजादी से पहले भी खूब चली और अब भी चल रही है। उम्मीद थी कि अंग्रेज इसे अपने साथ लेकर जाएेंगे लेकिन अंग्रेज
चले गए, लाठी छोड़ गए। 

पैसों की लाठी-
इस लाठी से कुछ भी काम करवाए जा सकते हैं। यह लाठी वास्तव में जादुई है। यह अनहोनी को होनी में बदल
देती है। इसकी मार से दफ्तर में पड़ी फाइल की धूल तुरंत झड़ जाती है। 

संगठन की लाठी-
जिस लाठी से गांधीजी अंग्रेजों को मार भगाया उसी लाठी से अब गांधीजी को विलायत पहुंचा दिया है। 
अब देश में कम विदेशों में उनके  विचारों और प्रतिमाओं को स्थापित किया जा रहा है। 

धर्म की लाठी-
यह लाठी दुनियाभर में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पड़ रही है। यह लाठी इतनी मजबूत है कि टूटने का नाम नहीं
ले रही है। जिस तरह से तेल पिलाने से लाठी मजबूत होती है उसी तरह खून पी पी कर धर्म की लाठी दिन प्रतिदिन मजबूत
होती जा रही है। 


बुजुर्ग की लाठी- 
यह लाठी अनुभवों मजबूत होती है। जिसे पड़ जाए उसका जीवन संवर जाए। समस्या यह है कि इस लाठी
को अब शहरी लोग घर में रखना कम ही पसंद करते हैं। आश्रमों में फेंक कर इसे सड़ने पर मजबूर कर दिया जाता है।
 
ईश्वर की लाठी-
यह लाठी सबसे लंबी होती है। कहते हैं इस लाठी में आवाज नहीं होती है। जिसे पड़ती है वही इसकी आवाज सुन सकता है
और समझ सकता है। इन्साफ न मिलने पर देश के कई मजलूम इसे जालिमों पर पड़ने का इंतजार करते हैं।
पति परमेश्वर ,पत्नी देवी
कई सालों से हम यह सुनते आए हैं कि पति परमेश्वर होता है। पत्नी को उसकी हर बात माननी चाहिये। यदि पति परमेश्वर है तो पत्नी को भी देवी का दर्जा प्राप्त है। 
फिर भी पतिदेव इस देवी का दमन करता है। उसे बराबरी का दर्जा नहीं देता। अपनी हर बात मनवाना चाहता है। जाहिर है जाहिल पति इस अबला नारी को मार ठोंक
कर अपनी बात मनवाना चाहता है और अक्लमंद ब्रैनवाश कर इस अल्लाह मियां की गाय का दोहन करना चाहता है। यदि आप भी दुखियारी पत्नी हैं तो 
सुखी पारिवारिक जीवन के लिए आइये हम आपको ब्रैनवाश के लिए ले चलते हैं शहर के सबसे बेस्ट काउंसलर के पास।

अगर पति किसी सुंदर स्त्री को देखे तो?
जाहिर है जलन होगी जैसी कि हर पत्नी को होती है। लेकिन आप शांत रहिये। आपका पति सामनेवाली स्त्री से आपकी तुलना कर यह 
तसल्ली करना चाहता है कि आपसे सुंदर कोई नहीं। 

यदि पति आपके पकवान की बुराई करे?
तो उसके सिर पर बेलन न द मारें। पकवान की बुराई का मतलब है वह अपने टेस्ट में सुधार चाहता है। कुछ नए पकवान चाहता है। 
इसके लिए वह खर्च करने को तैयार है। कुछ और पैसा आपके  हाथ लगने वाला है। 

यदि पतिदेव नींद में खरार्टे लें। आपको सोने नहीं दें ?
तो उनका गला दबा कर मार मत डालिये। यह समझिये कि आपसे शादी करके आपका पति कितना निश्चिंत है। यदि वह किसी अन्य स्त्री के चक्कर
में होता तो सो नहीं पाता और रातभर करवट बदलता। 

यदि पति आपके जन्मदिन पर गिफ्ट देना भूल जाए?
तो पांव मत पटकिये। वह आपके फ्यूचर के लिए बचत करना चाहता है। 

यदि वह देर से घर आये?
तो झगड़ा मत करिये। वह ओवर टाइम करने में लगा है। अधिक पैसा आने पर आखिर आपको ही शॉपिंग के लिए अधिक पैसा मिलने 
वाला है। 

यदि पति चाय के लिए कहे तो ?
झल्लाइये मत। इसका मतलब है कि अपका पति थका हुआ है। एक कप चाय पी कर वह फ्रे श होना चाहता है। फ्रेश हो कर वह आपको फिरसे नॉनस्टाप
सुनने के लिए तैयार है। 

मोरल आॅफ द स्टोरी?
पति परमेश्वर होता है।


आइये अब गाडी के दूसरे पहिये पर नजर डालते है। पत्नी से जुड़े सवालों पर पति का नजरिया भी यदि इसी तरह सकारात्मक रहे तो चुन्नू दे मुन्ने दे पापा दी गड्डी कभी
रु केगी नहीं। तो आइये आपको ले चलते हैं एक और स्वीट होम और ढूंढते हैं रोजमर्रा के सवालों के जवाब।
यदि पत्नी रूठ जाए-
तो समझिये विविध भारती का पंचरंगी प्रोग्राम कुछ समय के लिए बंद है। इससे आपको कुछ समय के लिए मानसिक शांति मिलेगी। 
यदि पत्नी चाय बनाकर न दे-
जाहिर है इससे शकर, चाय की पत्ती और दूध की बचत होगी। आपकी शुगर का लेवल नहीं बढ़ेगा।
आप दफ्तर से आएं और आपकी पत्नी के सिर पर पट्टी बांधे मिले-
तो समझ लेना आज खाना नहीं बना है। आज भूख हड़ताल है। इससे आपको वजन कम करने का मौका मिला है। 
यदि किचन से बर्तन पटकने की आवाज आए-
थैंक गॉड। आप बाल बाल बच गए। यह गुस्सा आप पर भी उतर सकता था। सिर सलामत तो जूते हजार। 
यह कहे कि आज मूड नहीं है-
तो आपकी चाहत और बढ़ जाएगी। अगली बार जब मूड बनेगा तो आपको घर की मुर्गी दाल बराबर नहीं लगेगी। 
यदि पत्नी मायके चली जाए. 
तो... पार्टी तो बनती है।
राम दुलारी मायके गई...
बच्चों के  एक्जाम होते ही पूरे देश में एक तरह से अफरा-तफरी का माहौल होता है। टिकट तो पहले ही बुक हो जाते हैं। आखिरी पर्चा होते ही पैकिंग शुरू हो जाती है। 
राम दुलारी को मायके जो जाना है। ऐसे में राम दुलारे की धड़कन बढ़ती जाती है। अब गर्मी की छुट्टियों में उसके पसीने जो छूटने वाले हैं। जिस घर में खाना मिलता 
था वही घर अब खाने को दौड़गा। नर्म और मखमली बिस्तर पर रात भर कांटे चुभेंगे। सुबह सुबह लगने वाली नींद दूधवाले के कानफ ोडू भौंपू से टूटने वाली है। फिर
झपकी लगते ही अखबार वाले की उंगली डोरबेल पर होगी। आंखे पूरी तरह से खुलेंगी नहीं और नल से पानी आने से पूर्व निकलने वाली हवा नींद उड़ा देगी। फिर 
नाश्ता बनाना होगा और टिफिन तैयार करना होगा। 
राम दुलारी के मायके जाते ही राम दुलारे की डबल ड्यूटी शुरू हो जाती है। वह सुबह-सुबह चाय शकर का डिब्बा ढंूढ रहा होता है कि पत्नी का एसएमएस आता है-
चाय-शकर पहले-दूसरे डिब्बे मेेंं ढूंढ लेना,
और हां आटे को अच्छी तरह गूंथ लेना।
रोटी जल्दी जल्दी पलटना कहीं जल न जाए,
दूध के पास ही खड़े रहना कहीं उफन न जाए।
मिल जाएं अगर नमक-मिर्ची तो खोना नहीं,
प्याज काटते वक्त बिलकुल रोना नहीं।
अलमारी में नीचे रखा बनियान और कच्छा है,
चुन्नू को डांटना मत वह अभी बच्चा है।
अचार की केरी लाई थी उन्हें काटना है,
हापुस भेज रही हूं, बिल्डिंग में बांटना है।
पत्नी के आदेशों का पालन कर राम दुलारे ने घर के काम पूरे किए और निकल गया आॅफिस। शाम को लौटा तो देखा गैस जल रही थी। नल खुला रह जाने के कारण
टंकी खाली हो गई थी। फ्रिज में न रखने के कारण दूध फट गया था। इधर राम दुलारे पर मुसिबतों का पहाड़ टूट पड़ा था तो दूसरी तरफ उसका पड़ोसी पार्टी मना रहा था।
उसकी पत्नी मायके जो गई थी। 
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