
Monday, 15 April 2019
टिकट की सही हक़दार नगमा हैं, बब्बर-अज़हर नहीं
-अमीन कुरेशी-
मुंबई. टिकटों की मारामारी को लेकर कांग्रेस के लिए कहा जाता था, यहाँ टिकट मांगता कोई और है, मिलता किसी और को है, चुनाव लड़ता कोई और है और जीतता कोई और है. राहुल गाँधी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद अब इस तरह की उलझन कम हुई है. समय से पहले टिकट बंटवारे की कवायद पूरी होने लगी है.
हालही में मुंबई की छह सीटों के दावेदारों के नामों पर चर्चा हुई. नाम लगभग तय हैं. इसमें उत्तर भारत से राज बब्बर और दक्षिण भारत से अज़हरुद्दीन मुंबई-३ पेंच फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. मुंबई नार्थ सेंट्रल की इस सीट से पिछले चुनाव में प्रिया दत्त बीजेपी की पूनम महाजन से हार गईं थी और तब से ही वे निष्क्रिय हैं. निष्क्रियता के कारण ही राहुल गाँधी ने पार्टी जनरल सेक्रेटरी पद से उनकी हकालपट्टी की है. उनके कुछ पिछलग्गू फिर भी टिकट देने की मांग कर रहे हैं. इस पर प्रिया का यह कहना है कि अगर राहुल गाँधी खुद उनसे अनुरोध करेंगे तो वे चुनाव लड़ने पर विचार करेंगी. लगता है राहुल गाँधी अब प्रिया को आराम करने देंगे. अगर प्रिया में सुर्खाब के पर लगे होते तो जनरल सेक्रेटरी पद से उनकी छुट्टी नहीं होती. पार्टी को अब सक्रिय और आक्रामक नेताओं की ज़रुरत है.
प्रिया के चुनाव लड़ने से इंकार के बाद अब इस सीट से नगमा ने अपना दावा पेश किया है. वह पिछले डेढ़ दशक से पार्टी में एक्टिव हैं. चुनावों की स्टार प्रचारक हैं. महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी हैं.
महाराष्ट्र में मुंबई-३ का शुमार मुस्लिम बहुल सीटों में होता है. इस बार यहाँ से कांग्रेस की जीत पक्की है. इसीलिए राज बब्बर और अज़हरुद्दीन की लार इस सीट के लिए टपक रही है. पार्टी राज बब्बर को मुंबई-५ अर्थात नार्थ मुंबई से लड़ाना चाहती है. बीजेपी के राम नाईक यहाँ से चुनाव लड़ा करते थे. गोविंदा और फिर निरुपम से हारने के बाद राम नाईक ने यह सीट गोपाल शेट्टी के लिए खली करदी. गोपालजी यहाँ के वर्तमान सांसद हैं. निरुपम पिछला चुनाव हार गए थे.
मुंबई प्रदेश कांग्रेस प्रमुख संजय निरुपम अब सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहते और मुंबई की एक और सेफ सीट मुंबई-४ ( नार्थ -वेस्ट ) से दावा कर रहे हैं. गुरुदास कामत पिछले चुनाव में यहीं से लड़े थे.
कामत और मुरली देवड़ा के देहांत के बाद भी मुंबई कांग्रेस में गुटबंदी समाप्त नहीं हुई है. यही कारण है निरुपम के दावे को कृपा शंकर सिंह ने यह कर ख़ारिज कर दिया कि उन्हें मुंबई -५ से ही लड़ना चाहिए. वे जुझारू हैं और यह सीट निकाल सकते हैं. कृपा भैया खुद मुंबई -४ से लड़ना चाहते हैं.
राज्य में एक दर्जन मुस्लिम बहुल सीटों पर मुस्लिम समाज ने भी अपनी दावेदारी पेश की है. महाराष्ट्र में ऐ आर अंतुले की जगह ले चुके पूर्व मंत्री नसीम खान भी मुंबई-३ से लड़ना चाहते हैं. ऐसे में नगमा को अपनी पूर्व आवंटित सीट मुंबई-४ दी जानी चाहिए. २००९ में भी नगमा का नाम यहाँ से पहले नम्बर पर था. इस बार महिला कांग्रेस ने भी आलाकमान से ३३ प्रतिशत सीटें महिलाओं को देने की मांग की है. खास कर नगमा जैसी सक्रिय महिलाओं को टिकट देने के लिए एक लिस्ट राहुल गाँधी को भेजी जा रही है.
मुंबई-१ ( साउथ मुंबई ) में मिलिंद देवड़ा का लड़ना तय है . मुंबई-२ ( साउथ सेंट्रल) में पूर्व वाईस चांसलर भालचंद्र मुंगेकर और एकनाथ गायकवाड़ के बीच रस्साकशी में मुंगेकर जीत सकते हैं. मुंबई-६ ( ईशान्य मुंबई अर्थात नार्थ ईस्ट ) एनसीपी के खाते में हैं.

बारिश में कुए चार्ज करें किसान :
जिन इलाकों में बारिश कम हो रही है वहां किसानों को कुए चार्ज करना चाहिए. इसके लिए खेत के पूरे पानी की निकासी कुए के आसपास हो. कुए के आसपास सोख्ता बना कर बारिश का पानी पाइप्स के जरिए कुए में भरा जा सकता है. यदि एक साथ आसपास के किसान अपने अपने खेतों में यह शुरुवात करते हैं तो पूरे गांव का वाटर लेवल ऊपर आ सकता है. वर्षा के पानी को रोक कर सूखे से बचा जा सकता है. रबी की फसल के लिए पानी उपलब्ध हो सकता.कुछ किसानों से इस सम्बन्ध में चर्चा हुई है. वह इस प्रयोग को करने के लिए तैयार है.
देखा गया है कि देश का हर दूसरा किसान बोरिंग कराने पर एक लाख रुपये खर्च करता है और पानी निकलता नहीं. देश के किसान कई करोड़ रूपए हर साल पानी की आस में लगा देते है.
बहुत कम खर्च में बारिश के बहते पानी से कुए भरे जा सकते है. कुए के आसपास खोदाई कर उसमें पत्थर, कोयला, मोती रेत, घांस की परत बिछा कर सोख्ता बनाया जा सकता है. कुए कि मुंडेर में होल कर एक एक फुट के पाइप फिट करने से पानी कुए में भरा जा सकता है.

हालातों में तप कर फौलाद बन चुके हैं राहुल गाँधी
(नेहरू की तरह आधुनिक भारत का निर्माता, इंदिरा की तरह विश्व ताकतवर, राजीव की तरह दूरदृष्टा -टेक्नोक्रेट और सोनिया की तरह शांति से क्रांति कर सकते हैं राहुल गाँधी)
-अमीन कुरेशी-
कल तक पप्पू कह कर विपक्ष जिसका मजाक उड़ाता था वह आज फौलाद बन चुका है. जिसको बच्चा साबित किया जा रहा था वह आज देश का सबसे ताकतवर और भरोसेमंद नेता बन कर उभरा है. राहुल गाँधी के व्यक्तित्व के विकास में चार दशक और इनमें होने वाले दर्दनाक हादसों ने एक नए लोह पुरुष को जन्म दिया है.
चार दशकों में सबसे पहले एक नन्हे बालक राहुल द्वारा अपनी दादी इंदिरा गाँधी की हत्या और उनका गोलियों से छलनी शरीर देखना. उनके अंतिम संस्कार में शामिल होना और घर में कई दिनों तक पसरे सन्नाटे में एक राजनितिक परिवार होने की पीड़ा को झेलना. कहते हैं नाती-पोते सबसे ज्यादा अपने दादा-दादी से अटैच होते हैं. दादी की लोरियां और गोदी छिन जाने का दुःख एक बच्चा ही समझ सकता है. फौलाद बनने की दिशा में यह पहली चोंट थी.
अगले ही दशक में अपने प्रिय पिता राजीव गाँधी को बम से उड़ा देने की खबर सुनना और फिर टुकड़े - टुकड़े शरीर को देखना, अदम्य साहस का काम है. इस गम को सह कर राहुल रुके नहीं.
तीसरे पड़ाव में यूपीऐ की सरकार. यहां लियो टॉलस्टॉय के शब्दों: टू ग्रेट वॉरियर-टाइम एंड पैशेंस को चरितार्थ होते देश ने राहुल के अंदर देखा. यूपीऐ-२ में प्रधान मंत्री बनने के अवसर और पार्टी अध्यक्ष बनने की मांग को ठुकरा कर उन्होंने पार्टी छत्रपों से और समय माँगा. दूसरी तरफ अपने ऊपर , अपनी मां और बहन पर विपक्ष की तरफ से की जा रहीं घटिया से घटिया टिप्पणियों पर धैर्य बनाए रखा. इस तीसरे पड़ाव तक राहुल गाँधी काफी-कुछ परिपक्व हो चुके थे.
(नेहरू की तरह आधुनिक भारत का निर्माता, इंदिरा की तरह विश्व ताकतवर, राजीव की तरह दूरदृष्टा -टेक्नोक्रेट और सोनिया की तरह शांति से क्रांति कर सकते हैं राहुल गाँधी)
-अमीन कुरेशी-
कल तक पप्पू कह कर विपक्ष जिसका मजाक उड़ाता था वह आज फौलाद बन चुका है. जिसको बच्चा साबित किया जा रहा था वह आज देश का सबसे ताकतवर और भरोसेमंद नेता बन कर उभरा है. राहुल गाँधी के व्यक्तित्व के विकास में चार दशक और इनमें होने वाले दर्दनाक हादसों ने एक नए लोह पुरुष को जन्म दिया है.
चार दशकों में सबसे पहले एक नन्हे बालक राहुल द्वारा अपनी दादी इंदिरा गाँधी की हत्या और उनका गोलियों से छलनी शरीर देखना. उनके अंतिम संस्कार में शामिल होना और घर में कई दिनों तक पसरे सन्नाटे में एक राजनितिक परिवार होने की पीड़ा को झेलना. कहते हैं नाती-पोते सबसे ज्यादा अपने दादा-दादी से अटैच होते हैं. दादी की लोरियां और गोदी छिन जाने का दुःख एक बच्चा ही समझ सकता है. फौलाद बनने की दिशा में यह पहली चोंट थी.
अगले ही दशक में अपने प्रिय पिता राजीव गाँधी को बम से उड़ा देने की खबर सुनना और फिर टुकड़े - टुकड़े शरीर को देखना, अदम्य साहस का काम है. इस गम को सह कर राहुल रुके नहीं.
तीसरे पड़ाव में यूपीऐ की सरकार. यहां लियो टॉलस्टॉय के शब्दों: टू ग्रेट वॉरियर-टाइम एंड पैशेंस को चरितार्थ होते देश ने राहुल के अंदर देखा. यूपीऐ-२ में प्रधान मंत्री बनने के अवसर और पार्टी अध्यक्ष बनने की मांग को ठुकरा कर उन्होंने पार्टी छत्रपों से और समय माँगा. दूसरी तरफ अपने ऊपर , अपनी मां और बहन पर विपक्ष की तरफ से की जा रहीं घटिया से घटिया टिप्पणियों पर धैर्य बनाए रखा. इस तीसरे पड़ाव तक राहुल गाँधी काफी-कुछ परिपक्व हो चुके थे.
अब आया चौथा पड़ाव. विपक्ष ने वास्तव में पप्पू को पप्पा बना दिया. विपक्ष के नेता जैसे जैसे नेहरू-गाँधी परिवार को नीचे गिराते गए, राहुल का कद बढ़ता गया. आलोचना की आग में राहुल तप कर अब फौलाद बन चुके हैं. लोह पुरुष बन चुके हैं. राहुल वास्तव में अब देश के नेतृत्व के काबिल हैं. पूरा देश अब उनसे उम्मीद लगाए बैठा है. लोगों को अब विश्वास हो गया है कि राहुल गाँधी, नेहरू की तरह आधुनिक भारत का निर्माता, इंदिरा की तरह विश्व ताकतवर, राजीव की तरह दूरदृष्टा -टेक्नोक्रेट और सोनिया की तरह शांति से क्रांति कर सकते हैं.
राज्यसभा से भी चल सकता है देश:-
-पत्रकार/प्रोफेसर अमीन कुरेशी-
लोकसभा की क्या ज़रुरत. देश राज्यसभा से भी चल सकता है. इसी तरह विधानसभा समाप्त कर राज्य चलाने की जिम्मेदारी विधान परिषद् को दी जा सकती है. सभी संवैधानिक संस्थान प्रमुख, चीफ जस्टिस, सरकारी विभाग के शीर्ष अधिकारी, वॉइस चांसलर, बैंक चेयरमैन इत्यादि पदेन सदस्य हो सकते हैं.
लोकसभा और विधानसभा के चुनाव बहुत खर्चीले हैं. करप्शन की जड़ हैं. समाज विभाजक हैं. हिंसक हैं. अनपढ़ और अपराधियों के अड्डे हैं. झूठे वादों के मंच हैं. लूट के तंत्र हैं. इन पर से जनता का विश्वास उठ चुका है. कोई विकल्प नहीं है. इसलिए लोग मतदान में नोटा दबाने लगे हैं. ३०-४० प्रतिशत तो वोट डालने ही नहीं जाते हैं. १०-२० प्रतिशत वोट खरीदकर या डरा कर डलवाए जाते हैं. १०-२० प्रतिशत वोट पार्टी कार्यकर्ताओं के होते हैं. इनके अपने आर्थिक और राजनीतिक कारण होते हैं.
कुलमिलाकर हमारा राजनीतिक तंत्र खोखला हो चुका है. विकल्प राज्यसभा और विधानपरिषद हो सकते हैं. विचार करके देखिये. अच्छा लगेगा. तब तक लोकसभा और विधानसभा के लिए वोटिंग करते रहिये.

भोपाल में टीना इफेक्ट
भोपाल लोकसभा सीट पर कमल नाथ ने दिग्विजय सिंह को टिकट दे कर कमाल का टीना इफेक्ट क्रिएट किया है. राजनीति में इसे कहते हैं ' देयर इज़ नो अल्टरनेटिव ' (टीना). श्री सिंह ने टिकट मिलने के बाद जो पकड़ बनाई है उससे यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस ने बीजेपी में टीना इफेक्ट पैदा कर दिया है. मामा, मामी, काका, काकी, भुआ, ताई...कोई भी चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं. सिंधिया भी इंदौर में यही इफेक्ट पैदा कर सकते थे.

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इमरान कहते हैं कि मोदी के जीतने के बाद भारत-पाक के रिश्ते बेहतर हो सकते हैं. कश्मीर समस्या का हल निकल सकता है. कप्तान साब पांच साल से मोदी ही प्रधानमंत्री हैं. न रिश्ते सुधरे और न ही कश्मीर समस्या हल हुई है. समस्या के हल के लिए पहले दोनों देशों के अंदर सौ फीसद हिन्दू - मुस्लिम सौहार्द ज़रूरी है.