ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा
अमीन कुरेशी
हमारे देश में तेज़ी से मालामाल होने के धंधे में राजनीति का स्थान अब तक प्रथम रहा है और आगे भी रहेगा लेकिन भ्रष्ट नेताओं की गिरफ्तारी ने अन्य नेताओं को सोचने पर ज़रूर मजबूर कर दिया है कि वे जनता के पैसों को लूट कर जिंदगी भर मज़ा नही कर सकते. एक न एक दिन उन्हें भी जेल की हवा खानी पड़ सकती है.
भ्रष्टाचार के खिलाफ हर तरफ जारी मुहिम के बीच भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी नेताओं को चेताया है कि अगर उन्हें पैसा कमाना है तो वह व्यवसाय करें, बिजनेस करें और उसके जरिए खुद भी कमाएं और दूसरों को भी रोजगार दें मगर राजनीति को पैसा कमाने का जरिया न बनाएं. गडकरी ने साफ किया कि जो भी कार्यकर्ता विधायक या सांसद बनकर पैसा कमाने की कोशिश करेगा उसके लिए भाजपा में कोई जगह नहीं है.
यह अलग बात है कि येदियुरप्पा और अन्य भाजपा नेता भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए है, कमसेकम बड़े नेता यह कहने पर बाध्य हुए हैं कि राजनीति पैसा कमाने का जरिया नहीं है.
नेता ही नही नवजात नेते भी यह देख सकते हैं कि दिल्ली की तिहाड़ जेल जो हमेशा से खतरनाक मुजरिमों का ठिकाना बनता रहा है वहां अब सियासी नेताओं और हाई प्रोफाइल लोगों की पनाहगाह बन गई है . यहां आजकल दो दर्जन से अधिक हाईप्रोफाइल कैदी डेरा डाले हुए हैं. खास बात यह है कि 18 वीआइपी कैदी तो हाल ही में 2जी स्पेक्ट्रम व सीडब्लूजी घोटाले के आरोपी के रूप में आए हैं. हाल में आए 18 वीवीआइपी कैदियों में से 13 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपी हैं.इसमें पूर्व केंद्रीय सूचना मंत्री ए राजा भी शामिल हैं. राजा तिहाड़ की जेल संख्या एक में बंद हैं. उनके साथ इस घोटाले से जुड़े कई कॉरपोरेट अधिकारी व व्यवसायी जो घोटाले में आरोपी हैं, जेल संख्या-एक में हैं. इनमें पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बरुआ के अलावा आरके चंदोलिया, शाहिद बलवा, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, सुरेंद्र पिपारा व गौतम दोषी जेल संख्या एक में बंद हैं. इसके अलावा 2जी मामले में ही अन्य आरोपी हरि नायर, संजय चंद्रा व विनोद गोयनका तीन नंबर जेल में बंद हैं. घोटाले से जुड़े दो अन्य आरोपी कनीमोरी व शरद कुमार तिहाड़ में हैं . वहीं सीडब्ल्यूजी घोटाले के आरोपी सुरेश कलमाड़ी, सुरजीत लाल, एबी प्रसाद, पूर्व सीडब्ल्यूजी सचिव ललित भनोट व पूर्व महानिदेशक वीके वर्मा चार नंबर जेल में बंद हैं.इनके अलावा कई और भी हाईप्रोफाइल कैदी जेल में बंद हैं। उन कैदियों में मनु शर्मा, विकास यादव, आरके शर्मा, माधुरी गुप्ता, शारदा जैन व हाल ही में कबूतरबाजी के आरोप में तिहाड़ पहुंचे क्रिकेटर जैकब मार्टिन शामिल हैं.
इन लोगों को देख कर एक सवाल उठता है कि आखिर भ्रष्ट मार्गों से जमा धन से इनकी क्या गत हुई है. एक समय था जब कलमाडी की कांग्रेस और पुणे में तूती बोलती थी. अमर सिंह किंग मेकर हुवा करते थे. राजा ने बहुत कम आयु में अपना राज कायम कर लिया था. बलवा का जलवा था. बुरे कामों का बुरा अंजाम आज सबके सामने है. इसीलिये गीता में कहा गया है ' कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'. इस पंक्ति का अर्थ हम यही जानते हैं की कर्म करने में ही हमारा अधिकार हो, फल में कभी नहीं . भाव यह बनता है कि यदि हम अच्छा कर्म करें तो अच्छा फल मिलेगा. और यदि बुरा कर्म करें तो बुरा फल मिलेगा . यदि हम इस अर्थ को सही मान लें तो इसका अर्थ है कि हमें अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के कर्म करने का अधिकार है . अर्थात अच्छे कर्म करो और फल की इच्छा न करो और बुरा कर्म करो और फल की इच्छा न करो . पहला अर्थ तो उचित है परन्तु दूसरा अर्थ तो यह हुआ कि अपराध करो और जेल रूपी फल की इच्छा न करो. वास्तव में कर्म शब्द का अर्थ है - 'शुभ कर्म . कर्मण्ये वा अधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन का अर्थ है - हमारा शुभ (अच्छे ) कर्म करने में ही अधिकार है, और शुभ कर्म के फल की इच्छा भी नहीं करनी चाहिए (क्योकि कर्म फल तो निश्चित ही है ) अर्थात ईश्वर ने हमें केवल शुभ कर्म करने का ही अधिकार दिया है, अशुभ कर्म करने का नहीं.
जीवन की अवधि बहुत कम होती है और इसलिए कहाजाता है जितने हो सकें अच्छे कर्म इस जिंदगी में करना चाहिए क्योंकि यह ' ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा'.
No comments:
Post a Comment