Monday, 15 April 2019

हालातों में तप कर फौलाद बन चुके हैं राहुल गाँधी
(नेहरू की तरह आधुनिक भारत का निर्माता, इंदिरा की तरह विश्व ताकतवर, राजीव की तरह दूरदृष्टा -टेक्नोक्रेट और सोनिया की तरह शांति से क्रांति कर सकते हैं राहुल गाँधी)
-अमीन कुरेशी-
कल तक पप्पू कह कर विपक्ष जिसका मजाक उड़ाता था वह आज फौलाद बन चुका है. जिसको बच्चा साबित किया जा रहा था वह आज देश का सबसे ताकतवर और भरोसेमंद नेता बन कर उभरा है. राहुल गाँधी के व्यक्तित्व के विकास में चार दशक और इनमें होने वाले दर्दनाक हादसों ने एक नए लोह पुरुष को जन्म दिया है.
चार दशकों में सबसे पहले एक नन्हे बालक राहुल द्वारा अपनी दादी इंदिरा गाँधी की हत्या और उनका गोलियों से छलनी शरीर देखना. उनके अंतिम संस्कार में शामिल होना और घर में कई दिनों तक पसरे सन्नाटे में एक राजनितिक परिवार होने की पीड़ा को झेलना. कहते हैं नाती-पोते सबसे ज्यादा अपने दादा-दादी से अटैच होते हैं. दादी की लोरियां और गोदी छिन जाने का दुःख एक बच्चा ही समझ सकता है. फौलाद बनने की दिशा में यह पहली चोंट थी.
अगले ही दशक में अपने प्रिय पिता राजीव गाँधी को बम से उड़ा देने की खबर सुनना और फिर टुकड़े - टुकड़े शरीर को देखना, अदम्य साहस का काम है. इस गम को सह कर राहुल रुके नहीं.
तीसरे पड़ाव में यूपीऐ की सरकार. यहां लियो टॉलस्टॉय के शब्दों: टू ग्रेट वॉरियर-टाइम एंड पैशेंस को चरितार्थ होते देश ने राहुल के अंदर देखा. यूपीऐ-२ में प्रधान मंत्री बनने के अवसर और पार्टी अध्यक्ष बनने की मांग को ठुकरा कर उन्होंने पार्टी छत्रपों से और समय माँगा. दूसरी तरफ अपने ऊपर , अपनी मां और बहन पर विपक्ष की तरफ से की जा रहीं घटिया से घटिया टिप्पणियों पर धैर्य बनाए रखा. इस तीसरे पड़ाव तक राहुल गाँधी काफी-कुछ परिपक्व हो चुके थे.
अब आया चौथा पड़ाव. विपक्ष ने वास्तव में पप्पू को पप्पा बना दिया. विपक्ष के नेता जैसे जैसे नेहरू-गाँधी परिवार को नीचे गिराते गए, राहुल का कद बढ़ता गया. आलोचना की आग में राहुल तप कर अब फौलाद बन चुके हैं. लोह पुरुष बन चुके हैं. राहुल वास्तव में अब देश के नेतृत्व के काबिल हैं. पूरा देश अब उनसे उम्मीद लगाए बैठा है. लोगों को अब विश्वास हो गया है कि राहुल गाँधी, नेहरू की तरह आधुनिक भारत का निर्माता, इंदिरा की तरह विश्व ताकतवर, राजीव की तरह दूरदृष्टा -टेक्नोक्रेट और सोनिया की तरह शांति से क्रांति कर सकते हैं.
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