Friday, 4 March 2011

होली के आईपीओ


होली के लिए खास लेख
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होली के आईपीओ 
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लेखक; अमीन कुरेशी, वरिष्ठ पत्रकार.मुंबई

उर्दू में एक शब्द है हम. इससे कुछ शब्द जोड़कर कई शब्दों का निर्माण हुआ है. जैसे हमसफर, हमराज, हमजोली, हमनिवाला, हमप्याला, हमखयाल, हमदम इत्यादि इत्यादि.

भाषा के इस सिक्वल की तरह फिल्मों में भी अब सीक्वल देखने को मिलते हैं। पहले नागिन फिर नगीना. धूम, धूम२, धूम३ इत्यादि. अमिताभ बच्चन की हिट फिल्म डान का रीमेक बानाने के बाद  हाल ही मैं शाहरुख खान ने डान-२ की शूटिंग शुरू की है.

किसी एक बिजनेस में सफल होने के बाद कंपनियों का विस्तार अन्य क्षेत्रों में होने लगता है और किस तरह से पूरे बाजार का दोहन किया जाए या किस तरह से ग्राहक और निवेशकों के खीसे से पाईपाई झटक ली जाए इसकी योजना अब कंपनियां बनाने लगी हैं.  होली पर हमने अम्बानी भाई को सलाह दी है कि वे इस रंगारंग फेस्टिवल पर कुछ नए आईपीओ बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज में रजिस्टर करें. उनके नाम के अनुरूप ही हम सीक्वल का सुझाव दे रहें हैं. यह सीक्वल का चलन बिजनेस वर्ल्ड में धूम मचा देगा.आशा है वे होली के अवसर पर बुरा न मानेंगे.
 
सभी जानते हैं कि रिलायंस का  बड़ा नाम है. रिलायंस  के और  आईपीओ  बाज़ार में आते हैं तो उनके नाम कुछ इसतरह से होंगे.

रिलायंस पॉवर; पोलिटिकल कंपनी  ( पार्टी) के विस्तार के लिए. 
रिलायंस टॉवर; रीयल एस्टेट के लिए.
रिलायंस शॉवर; बाथरूम फिटिंग्स के लिए. 
 
 
शाहरुख खान और प्रीति जिंटा ने खेल की दुनिया को और विशेष कर क्रिकेट को और ग्लैमरस कर दिया है। खुद अनिल अम्बानी मुंबई में होने वाली दौड़ में हर साल हिस्सा लेते हैं.  यदि अंबानी भी खेलों और विशेषकर देशी खेलों को प्रमोट करना चाहते हैं और उसके लिए भी आईपीओ लाना चाहते हैं तो उसका नाम कुछ देशी स्टाइल में 'रिलायंस  कबड्डी' हो तो अच्छा रहेगा।
 
रिलायंस  कबड्डी; खेलकूद का सामान बनाने के लिए.
रिलायंस चड्डी; गारमेंट के लिए.
रिलायंस  बड्डी; रिलायंस निवेश परिवार.
 
रिलायंस चड्डी नाम से गारमेंट के कारोबार में चड्डी और छोटे कपड़े पहनने वाले लोग जैसे विजय माल्या, मलिका शेरावत इत्यादि के साथ जोइंट वेंचर किया जा सकता है.
 
कबड्डी तो आप समझ ही गए होंगे। बड्‌डी से भी कुछ आशय निकाला होगा। 'रिलायंसबड्डी' यह आईपीओ उन लोगों के लिए होगा जो रिलायंस में अटूट विश्वास रखते हैं। जिन्हें पैसा काटता है। निवेश की छटपटाहट इतनी कि किसीनकिसी तरीके से पैसा अंबानी के हवाले कर दिया जाए। कई लोगों को मलाल है कि वे रिलायंस में निवेश नहीं कर पाए। अब अंबानी को इन लोगों को दिलासा देने के लिए एक सप्लीमेंट्री आईपीओ लाना चाहिए। इसका नाम रिलायंसबड्‌डी हो तो बेहतर होगा। इससे कम से कम बचे हुए लोगों की निवेश का सपना पूरा हो सकेगा। 
 
निजिकरण के दौर में कंपनियां हर चीज़ को हथियाने में लगी हैं. कल्पना कीजिये यदि रिलायंस, पावर और टावर और शॉवर के बाद कंपनी खोलते के बाद यदि अंबानी ब्रदर्स फर्नीचर, अस्पताल, और कृषि मशीनरी के बिजनेस को भी कैपचर करना चाहेंगे तो उनके आईपीओ के नाम कुछ इस तरह से होंगे-

रिलायंस  फर्नीचर; स्कूल और दफ्तरों में टेबल कुर्सी सप्लाई के लिए.
रिलायंस  फ्रैक्चर; अस्पताल सेवा के लिए.
रिलायंस  ट्रैक्टर;  कृषि मशीनरी के बिजनेस लिए. 
रिलायंस  जनरेटर; माल जनरेट करने के लिए.

रिलायंस जनरेटर नाम का आईपीओ उन लोगों के लिए होगा जो कड़के हैं लेकिन बाजार में मुंह मारने के लिए उनकी  लार टपकती है और वे अठन्नीचवन्नी लगा कर लखपति बनने का सपना देखते हैं। अंबानी को देश के उन लोगों को भी ऊपर लाने का काम करना चाहिए जो गरीबी रेखा के नीचे हैं। रेखा के ऊपर के लोग पहले ही मालामाल हो चुके हैं। 
 
मुंबई और दिल्ली महानगर के लोग जानते हैं कि उनके घर रिलायंस एनेर्जी से रोशन  हैं. अब यदि रिलायंस को रिलायंस एनेर्जी का विस्तार करना हो और ग्रामीण भाग में जाना हो तो निम्न लिखित नाम से आप भी सहमत होंगे-
 
रिलायंस बिजली; ग्रामीण  भाग होंगे रोशन.
रिलायंस खुजली; स्कीन केयर.
 
रिलायंस बिजली के साथ साथ रिलायंस खुजली नाम से भी यदि शेयर आते हैं तो ओवरसब्सक्रायीब होने मैं समय नहीं लगेगा.
स्कीन केयर के इस शेयर से निवेशकों कि पैसा गवानें की और अम्बानी की पैसा कमाने की खुजली मिट जाएगी. दूसरी तरफ हमारे  देश में लोगों को कई तरह कि खुजली की बीमारी है. जैसे राजनीती की खुजली, जातिवाद की खुजली, प्रांतवाद की खुजली, भाषावाद की खुजली, आतंकवाद की खुजली...इनको खुजाते खुजाते  देश लहूलुहान हो गया है. अब इंटेंसिव  केयर की ज़रुरत है.

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