Saturday, 12 March 2011

4 lines

कम सामान रखना, जिन्दगी आसान रखना |
फ़िक्र औरों की है लाजिमी, पहले अपना ध्यान रखना |
हर कोई कतरा के चल दे, ऐसा क्या अभिमान रखना |
रास्तों पर रखना आँखें, आहटों पर कान रखना |
भीड़ में मिल जुल के भी तू, अपनी कुछ पहचान रखना |
ज्ञान बिन है व्यर्थ जीवन, कम से कम ये ध्यान रखना |

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उसको चाह तो बहुत मगर वो मिला ही नहीं,
लाख कोशिश की मगर फासला मिटा ही नहीं,
उसको ज़माने ने मजबूर इस क़दर कर दिया
की मेरी किसी सदा पे वो रुका ही नहीं,
हर एक से पुछा सबब उसके ना मिलने का,
हर एक ने बताया की वो मेरे लिए बना ही नहीं....!!!

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ईश्वर का दिया कभी 'अल्प' नहीं होता,
जो टूट जाये वो 'संकल्प' नहीं होता,
हार को लक्ष्य से दूर ही रखना,
क्यूंकि जीत का कोई 'विकल्प' नहीं होता.

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हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
...हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

- दुष्यन्त कुमार
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A Bird sitting on a tree
is not afraid of the branch breaking,

because bird's trust is not on the branch
but on its own wings !
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