Sunday, 27 March 2011

यंगिस्तान को और किया जाए यंग

जनरेशन नेक्स्ट / अमीन कुरेशी
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यंगिस्तान को और किया जाए यंग
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-प्रोफेशनल कोर्स में 10 वीं के बाद दिया जाए एडमिशन.
-प्रोफेशनल कोर्स की लेंथ की जाए कम.
-जॉब की उम्र हो 16 साल. 
-वोटिंग की उम्र हो 16 साल.
-लड़के की शादी की उम्र 18  हो.
-लडकी की 16 साल करदी जाए.


युवाओं को और युवा बनाने के लिए विभिन सरकारी मापदंडों में उनकी उम्र को नए सिरे से निर्धारित करने का समय लगता है अब आ गया है.  आज की फास्ट जनरेशन जीवन में सबकुछ बहुत फास्ट हासिल करना चाहती है. फास्ट जॉब, फास्ट मनी, फास्ट फ्रेंड, फास्ट शादी, फास्ट लाइफ .....और न जाने क्या क्या फास्ट. ऐसे में लगता है आज की युवा पीढ़ी को उम्र का अंकुश अब खटकने लगा  है.
वर्तमान कानून के अनुसार नौकरी करने के लिए कम से कम उम्र 18 साल होनी चाहिए. ड्राईविंग लाईसेंस के लिए  कम से कम उम्र 18 साल. शादी के लिए 21 साल. वोटिंग के लिए 18 साल. कानून के अनुसार लड़का - लडकी की शादी की उम्र भले ही अलग- अलग है लेकिन वोटिंग के लिए एक समान है. संसद में बैठे लोग शायद यह समझते हैं कि युवा 18 साल की उम्र में देश  चलाने लायक हो जाता है लेकिन घर चलाने लायक नही होता है.
एक आम मुहावरा हमारे देश में प्रचलित है कि पुराने लोग असली घी  खाए होते थे तो 100 साल जीते थे. अब खाने-पीने बहुत कुछ नकली सामान मिलता है. सामान नकली और लाइफ इज फास्ट. आदमी कब चट-पट हो जाए पता नही. हो भी रहा है. वैसे देश में औसत आयु 56 साल है लेकिन फास्ट होते तनाओं के कारण कई लोग तो हाल्फ सेंचुरी भी नहीं लगाते. ऐसे हालात में यदी जॉब की उम्र 16 साल,  ड्राईविंग लाईसेंस की उम्र 16 , वोटिंग की उम्र 16 साल , लड़के की शादी की उम्र 18 और लडकी की 16 साल करदी जाए तो युवकों के लिए और देश के लिए बेहतर ही होगा. तमिलनाडु सरकार द्वारा केंद्र को भेजे प्रस्ताव और कोर्ट में विभिन्न मामलों की सुनवाई के दौरान युवाओं की वयस्क होने की आयु कम करने की बात उठी है.
न सिर्फ उम्र की सीमा छोटी करने की ज़रुरत है बल्कि पढाई की डिग्रियों की भी लेंथ कम करने की ज़रुरत है. डाक्टर, इंजीनियर, वकील.....जैसे प्रोफेशनल कोर्स में 10 वीं के बाद ही दाखिला दे देना चाहिए. इस तरह के कोर्स और इंटर्नशिप पूरी करते करते युवा अपनी कमाई करने और सेवा करने की उम्र पार कर चुके होते हैं. मेरे एक डाक्टर मित्र हैं जिनकी शादी तो एम् बी बी एस के बाद हो गयी लेकिन एम् डी करते करते दो बच्चे भी हो गए और उम्र 45 हो गई. अपना अस्पताल जमाते- जमाते वह 50 पार कर जायेगे. यदि औसत आयु 56 वर्ष मानलें तो इस तरह के डाक्टर, इंजीनियर, वकील...... कितने दिन देश और समाज के काम आते है जिन्हें डाक्टर बनाने में लाखों रूपये खर्च होते हैं. वर्तमान एजुकेशन सिस्टम में युवा अपनी उम्र के  70 प्रतिशत साल सिर्फ पढाई में खपा देते हैं. यह व्यथा गरीब और मिडिल क्लास के नौजवान की है. देश के मलाईदर तबके के युवा 16 - 18 की उम्र में कंपनी की कमान संभाल लेते है. बाद में नाम मात्र के लिए डिग्री हासिल कर लेते है. यदि मंत्री या नेता पुत्र है तो विधायक, सांसद और मंत्री बनने में उसे डिग्री की कहीं ज़रुरत नहीं होती है. ऐसे लोग तो खुद डिग्रियां बांटते हैं.
दसवीं के बाद वैसे भी किसी स्ट्रीम का चयन करना होता है और आगे उसी में स्पेश्लायिज़ेशन करना होता है तो क्यों नहीं दसवीं के बाद ही प्रोफेशनल डिग्री कोर्स में एडमिशन दे दिया जाए. साथ ही  डाक्टर, इंजीनियर, वकील.....जैसे प्रोफेशनल कोर्स की लेंथ कम की जानी चहिये.
हिन्दुस्तान युवाओं का देश है। हमारी 50 फीसदी से ज्यादा आबादी 40 साल से कम उम्र वाले लोगों की है। यही आंकड़े हमें दुनिया के भूगोल का यंगिस्तान बनाते हैं। यही नौजवान हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं और सबसे बड़े संसाधन। ज़रुरत है इस यंगिस्तान की ज़रूरतों को समय पर पूरी  करने की.

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