Radiations:After Chernobyl now japan. Jaitapur (kokan) also is seismic pron. Project like SEZ and this can be setup on Baron land of Jhaboa, Kach, Jaiselmer etc
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सेज और परमाणु ऊर्जा परियोजना की तरह की योजनाएँ कच्छ, जैसलमेर और झाबुआ की बंजर जमीन पर क्यों नहीं कायम की जाती हैं.
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जैतापुर परमाणु बिजली परियोजना पर छाया अंधेरा
लेखक; अमीन कुरेशी
महाराष्ट्र के जैतापुर में 10,000 मेगावॉट क्षमता वाली परमाणु बिजली परियोजना पर अंधेरे के बादल छाने लगे हैं. परमाणु करार के बाद दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु बिजली परियोजना का किसानों से लेकर पर्यावरण से जुड़े लोग विरोध कार रहे हैं. कोकण तटीय इलाके रायगढ़ में हाल ही में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) योजना का अंत हो गया है। जैतापुर परमाणु बिजली परियोजना इससे लगे रत्नागिरि जिले में कायम की जा रही है. जमीन पूरी न मिलने के कारण सेज़ को समाप्त करना पड़ा है. जैतापुर में परमाणु बिजली परियोजना में भी जमीन बड़ा मुद्दा है लेकिन अन्य मुद्दे भी हैं जो इसकी राह को मुश्किल बना रहे है.
योजना से प्रभावित 2335 किसानों में से अब तक लगभग आधे किसानों ने ही सरकार को जमीन दी है. बाकी किसान तीव्र विरोध कर रहे हैं. किसानों के अलावा मछुआरों के आंदोलन भी हो रहे हैं. पर्यावरण से जुड़े लोग सबसे अधिक चिंतित हैं. रावलभाटा की तरह यहाँ भी विकीरण की आशंका जाता रहे हैं. कोकण के भूकंप प्रोन होने के कारण भी चिंता जतायी जा रही है. लोगों को लग रहा है कि सरकार साफ़ साफ़ बता नहीं रही है कि खतरा कितना है. प्रॉजेक्ट विरोधी समिति से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के रिटायार जज पी.बी. सावंत इस मामले में इंडियन ट्रिब्युनल ऑन इन्वायरनमेंट एंड ह्यूमन राइटस् में चर्चा चाहते हैं. समिति प्रॉजेक्ट से होने वाले विकिरण से चिंतित है और कह रही कि बुरे परिणाम से कई पीढि़यां प्रभावित होने की आशंका है।
मडवन गाँव में एक लाख करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली योजना पर राजनीति दल एक मत नहीं हैं. शिवसेना इसका विरोध कर रही है जबकि अन्य दल योजना के समर्थन में हैं.
पर्यावरण को नुकसान नही; मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण
राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का कहना है कि जैतापुर परमाणु बिजली परियोजना से पर्यावरण को कोइ नुकसान नही होगा. लोगो को इसका विरोध नही करना चाहिये. यह कोकण के लिए वरदान है. देश को बिजली केए जरूरत है. 50 प्रतिशत घरों में बिजली नहीं है. इस तरह की योजनाओं के अलावा अब कोई रास्ता नहीं है.मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना परमाणु ऊर्जा पर आधारित है इसलिए यह पर्यावरण, बागवानी और मत्स्य पालन के लिए नुकसानदेह नहीं है।उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि परियोजना से 100 करोड़ रुपये का निवेश आएगा जो इस क्षेत्र के विकास में सहयोग देगा।
विवाद राजनीतिक षड्यंत्र; जयराम रमेश
पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश का कहना है कि पर्यावरण मंत्रालय को जैतापूर परमाणु प्लांट पर कोई आपत्ति नहीं है और मंत्रालय ने इस प्लांट को पहले से ही मंजूरी दी हुई है. जैतापुर परमाणु प्लांट पर जारी विवाद राजनीतिक षड्यंत्र है। ऐसे में पर्यावरण मंत्रालय की जैतापुर विवाद को लेकर कोई नया फैसला लेने की योजना नहीं है.
शिवसेना कोकण की जनता के साथ; बाल ठाकरे
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा कि स्थानीय लोग इस परियोजना के विरोध में हैं और शिवसेना कोकण की जनता के साथ है। श्री ठाकरे ने अपनी पार्टी के विधायकों को आक्रामक तेवर अपनाने को कहा है। उन्होंने विधायकों को बजट सत्र के दौरान आक्रामक तेवर अपनाने का आदेश दिया है। शिवसेना इस परियोजना का विरोध कर रही है जबकि उसकी चुनावी सहयोगी भाजपा ने परियोजना को सशर्त समर्थन दिया है।
सरकार पर भरोसा नहीं; जनहित सेवा समिति
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना के विरोधियों के बीच बातचीत हुई। चव्हाण ने परियोजना का विरोध कर रहे किसानों और ग्रामीणों से अपील की है कि वे परियोजना के बारे गलत तथ्यात्मक जानकारी पर विश्वास न करें और इसके विकास में अपना सहयोग दें। वहीं दूसरी तरफ, जनहित सेवा समिति के बैनर तले एकत्रित हुए किसानों ने परियोजना को रद्द करने, जमीन वापस करने और पुलिस में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की। जनहित सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य प्रवीण गवंकर ने आरोप लगाया कि परियोजना को तटीय नियामक क्षेत्र के प्रतिबंधों से तकनीकी छूट के आधार पर पूरा किया जाएगा। मछुआरा समुदाय के नेता अमजद बोरकर ने कहा कि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि अगर परियोजना से मछली मारना प्रभावित होता है तो किस तरह से गांव वालों को मुआवजा दिया जाएगा।
सस्ती बिजली मिलेगी; शरद पवार
केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने जैतापुर परमाणु परियोजना का मजबूती से समर्थन किया है। उन्होंने कहा, 'इससे हमे सस्ती बिजली मिलेगी और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा। मेरी समझ से साफ स्वच्छ परियोजना है। इस संबंध में हम पहले ही परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल काकोडकर और अन्य कृषि विशेषज्ञों से बात कर चुके हैं।
उद्धव और राणे आमने-सामने जैतापुर प्रॉजेक्ट के मामले में शिवसेना और कांग्रेस में कोकण पर राज करने की राजनीति भी हो रही है. शिवसेना के कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के उद्योग मंत्री नारायण राणे आमना-सामना हैं. शिवसेना प्रॉजेक्ट के विरोधी में आंदोलन को समर्थन दे रही है. कोकण के नेता नारायण राणे ने प्रॉजेक्ट को पूरा करने की कसम खाई है.
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सेज और परमाणु ऊर्जा परियोजना की तरह की योजनाएँ कच्छ, जैसलमेर और झाबुआ की बंजर जमीन पर क्यों नहीं कायम की जाती हैं.
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जैतापुर परमाणु बिजली परियोजना पर छाया अंधेरा
लेखक; अमीन कुरेशी
महाराष्ट्र के जैतापुर में 10,000 मेगावॉट क्षमता वाली परमाणु बिजली परियोजना पर अंधेरे के बादल छाने लगे हैं. परमाणु करार के बाद दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु बिजली परियोजना का किसानों से लेकर पर्यावरण से जुड़े लोग विरोध कार रहे हैं. कोकण तटीय इलाके रायगढ़ में हाल ही में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) योजना का अंत हो गया है। जैतापुर परमाणु बिजली परियोजना इससे लगे रत्नागिरि जिले में कायम की जा रही है. जमीन पूरी न मिलने के कारण सेज़ को समाप्त करना पड़ा है. जैतापुर में परमाणु बिजली परियोजना में भी जमीन बड़ा मुद्दा है लेकिन अन्य मुद्दे भी हैं जो इसकी राह को मुश्किल बना रहे है.
योजना से प्रभावित 2335 किसानों में से अब तक लगभग आधे किसानों ने ही सरकार को जमीन दी है. बाकी किसान तीव्र विरोध कर रहे हैं. किसानों के अलावा मछुआरों के आंदोलन भी हो रहे हैं. पर्यावरण से जुड़े लोग सबसे अधिक चिंतित हैं. रावलभाटा की तरह यहाँ भी विकीरण की आशंका जाता रहे हैं. कोकण के भूकंप प्रोन होने के कारण भी चिंता जतायी जा रही है. लोगों को लग रहा है कि सरकार साफ़ साफ़ बता नहीं रही है कि खतरा कितना है. प्रॉजेक्ट विरोधी समिति से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के रिटायार जज पी.बी. सावंत इस मामले में इंडियन ट्रिब्युनल ऑन इन्वायरनमेंट एंड ह्यूमन राइटस् में चर्चा चाहते हैं. समिति प्रॉजेक्ट से होने वाले विकिरण से चिंतित है और कह रही कि बुरे परिणाम से कई पीढि़यां प्रभावित होने की आशंका है।
मडवन गाँव में एक लाख करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली योजना पर राजनीति दल एक मत नहीं हैं. शिवसेना इसका विरोध कर रही है जबकि अन्य दल योजना के समर्थन में हैं.
पर्यावरण को नुकसान नही; मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण
राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का कहना है कि जैतापुर परमाणु बिजली परियोजना से पर्यावरण को कोइ नुकसान नही होगा. लोगो को इसका विरोध नही करना चाहिये. यह कोकण के लिए वरदान है. देश को बिजली केए जरूरत है. 50 प्रतिशत घरों में बिजली नहीं है. इस तरह की योजनाओं के अलावा अब कोई रास्ता नहीं है.मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना परमाणु ऊर्जा पर आधारित है इसलिए यह पर्यावरण, बागवानी और मत्स्य पालन के लिए नुकसानदेह नहीं है।उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि परियोजना से 100 करोड़ रुपये का निवेश आएगा जो इस क्षेत्र के विकास में सहयोग देगा।
विवाद राजनीतिक षड्यंत्र; जयराम रमेश
पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश का कहना है कि पर्यावरण मंत्रालय को जैतापूर परमाणु प्लांट पर कोई आपत्ति नहीं है और मंत्रालय ने इस प्लांट को पहले से ही मंजूरी दी हुई है. जैतापुर परमाणु प्लांट पर जारी विवाद राजनीतिक षड्यंत्र है। ऐसे में पर्यावरण मंत्रालय की जैतापुर विवाद को लेकर कोई नया फैसला लेने की योजना नहीं है.
शिवसेना कोकण की जनता के साथ; बाल ठाकरे
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा कि स्थानीय लोग इस परियोजना के विरोध में हैं और शिवसेना कोकण की जनता के साथ है। श्री ठाकरे ने अपनी पार्टी के विधायकों को आक्रामक तेवर अपनाने को कहा है। उन्होंने विधायकों को बजट सत्र के दौरान आक्रामक तेवर अपनाने का आदेश दिया है। शिवसेना इस परियोजना का विरोध कर रही है जबकि उसकी चुनावी सहयोगी भाजपा ने परियोजना को सशर्त समर्थन दिया है।
सरकार पर भरोसा नहीं; जनहित सेवा समिति
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना के विरोधियों के बीच बातचीत हुई। चव्हाण ने परियोजना का विरोध कर रहे किसानों और ग्रामीणों से अपील की है कि वे परियोजना के बारे गलत तथ्यात्मक जानकारी पर विश्वास न करें और इसके विकास में अपना सहयोग दें। वहीं दूसरी तरफ, जनहित सेवा समिति के बैनर तले एकत्रित हुए किसानों ने परियोजना को रद्द करने, जमीन वापस करने और पुलिस में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की। जनहित सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य प्रवीण गवंकर ने आरोप लगाया कि परियोजना को तटीय नियामक क्षेत्र के प्रतिबंधों से तकनीकी छूट के आधार पर पूरा किया जाएगा। मछुआरा समुदाय के नेता अमजद बोरकर ने कहा कि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि अगर परियोजना से मछली मारना प्रभावित होता है तो किस तरह से गांव वालों को मुआवजा दिया जाएगा।
सस्ती बिजली मिलेगी; शरद पवार
केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने जैतापुर परमाणु परियोजना का मजबूती से समर्थन किया है। उन्होंने कहा, 'इससे हमे सस्ती बिजली मिलेगी और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा। मेरी समझ से साफ स्वच्छ परियोजना है। इस संबंध में हम पहले ही परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल काकोडकर और अन्य कृषि विशेषज्ञों से बात कर चुके हैं।
उद्धव और राणे आमने-सामने जैतापुर प्रॉजेक्ट के मामले में शिवसेना और कांग्रेस में कोकण पर राज करने की राजनीति भी हो रही है. शिवसेना के कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के उद्योग मंत्री नारायण राणे आमना-सामना हैं. शिवसेना प्रॉजेक्ट के विरोधी में आंदोलन को समर्थन दे रही है. कोकण के नेता नारायण राणे ने प्रॉजेक्ट को पूरा करने की कसम खाई है.
विकिरण निर्धारित सीमा से बहुत कम; परमाणु बिजली निगम
परमाणु बिजली निगम के संयुक्त निदेशक शशिकांत धरणे ने कहा कि जैतापुर परियोजना के लिए प्रस्तावित रिएक्टर (ईपीआर) विकासमूलक डिजाइन वाले हैं। इन्हें फ्रांस और जर्मनी में सफल एन4 और कॉनवॉल रिएक्टरों से विकसित किया गया है। ये प्रकृति और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक नहीं हैं। इन रिएक्टरों का जीवन काल 60 वर्ष है। इस अवधि के बाद इन्हें उसी तरह खपाया जा सकता है, जैसा कि दुनिया भर के तमाम परमाणु संयंत्रों में होता है। मानव समेत धरती के तमाम वनस्पति और जीव प्राकृतिक विकिरण का लगातार सामना कर रहे हैं। धरती पर और वातावरण में कई रेडियोधर्मी तत्व मौजूद हैं। सालाना स्तर पर प्राकृतिक विकिरण की औसत तीव्रता 2,400 माइक्रोसीवर्ट होती है।
एईआरबी ने परमाणु संयंत्र के अहाते में आम लोगों को अतिरिक्त विकिरण झेलने की सीमा 1,000 माइक्रोसीवर्ट निर्धारित की है। परमाणु संयंत्रों के पिछले अनुभव से पता चलता है कि इन संयंत्रों की वजह से आम लोगों को केवल 2-36 माइक्रोसीवर्ट अतिरिक्त विकिरण झेलना पड़ता है, जो निर्धारित सीमा से बहुत कम है।
एईआरबी ने परमाणु संयंत्र के अहाते में आम लोगों को अतिरिक्त विकिरण झेलने की सीमा 1,000 माइक्रोसीवर्ट निर्धारित की है। परमाणु संयंत्रों के पिछले अनुभव से पता चलता है कि इन संयंत्रों की वजह से आम लोगों को केवल 2-36 माइक्रोसीवर्ट अतिरिक्त विकिरण झेलना पड़ता है, जो निर्धारित सीमा से बहुत कम है।
देश में शहरीकरण, कारखानों, महामर्गो और बड़ी बड़ी योजनाओं के कारण खेती की जमीन रगबा लगातार कम होता जा रहा है. एक सर्व के अनुसार अगले 50 सालों में कृषि की जमीन का रगबा 15 प्रतिशत तक कम हो जयेगा अनाज की माँग डबल हो जयेगी.
देश भर में पहले सेज़ के विरोध में आंदोलन हुए और अब परमाणु ऊर्जा परियोजना का पिटारा खुला है. ऐसे में सवाल उठता है कि इस सेज और परमाणु ऊर्जा परियोजना की तरह की योजनाएँ कच्छ, जैसलमेर और झाबुआ की बंजर जमीन पर क्यों नहीं कायम की जाती हैं.
देश भर में पहले सेज़ के विरोध में आंदोलन हुए और अब परमाणु ऊर्जा परियोजना का पिटारा खुला है. ऐसे में सवाल उठता है कि इस सेज और परमाणु ऊर्जा परियोजना की तरह की योजनाएँ कच्छ, जैसलमेर और झाबुआ की बंजर जमीन पर क्यों नहीं कायम की जाती हैं.
सर, एनरोन का क्या हुआ था? आम आदमीको सिर्फ निशाना बनाया जाता है! ६० साल हुये हमे आजादी मिले| कितने गली कुंचेके लोग जानते है की ये परमाणु बिजली क्या होती है? मगर उन्ही बेचारोंको ही ज्यादातर इस जैतापुर परमाणु बिजली परियोजना जैसे प्रकल्पोंके विरोधमें भी और बाजुसे भी लडाया जाता है| कौन खेलता है ये खेल? काफिबार इन्हे लडानेवाले नेता और सरकारी बाबू अंदरसे एक दुसरेको मिले हुये होते है| लडनेंवालोमें फूट डालकर वे उनका निजी फायदा करवा लेते है| कई उदाहरण है! सामाजिक हित के नाम पर भी कई आंदोलन छेडे जाते है| जा रहे है| ऐसे कितने आंदोलानोंसे कुछ ठोस नतीजा निकल पाया है की जिससे कुछ मार्गदर्शक नियम या कानून बन पाया है? अब तो 'राईट ऑफ इन्फर्मेशन' का सपोर्ट लेकर कितानोने दुकान शुरू किये है? नयी पिढी जबतक सह रही है तबतक ठीक है| मगर इन्ही संस्कारोंमे पले पाले नावजवानोंके हातमें ही फिर एक बार सारा नियंत्रण गया, तो अपनेही लोगोंका गुलाम बने मारना अटल है| ये निराशा नही, चिंता है! कभी ना कभी तो १०० अपराधोंकी सुनवाई होनी ही है|
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