किसी का शक्तिकरण, किसी का तुष्टिकरण, किसी का सुस्तीकरण और किसी का पुष्टिकरण
हमारे देश में धर्म, जाति, भाषा, प्रांत ... और न जाने किन किन के आधार पर भेदभाव की शिकायत कई लोगों को है। किसी का तुष्टिकरण,
किसी का सुस्तीकरण तो किसी का पुष्टिकरण। और अब महिला सशक्तिकरण। कुछ राजनीतिक दलों के नेता
दिखावे के लिए इस बात से सहमत हैं कि महिलाओं को राजनीतिक के शीर्ष मंच पर 33 प्रतिशत स्थान दिए जाएं। इसके लिए
वुमंस रिजर्वेशन बिल कई दिनों से बिल में पड़ा है। इसके तहत लोकसभा और विधानसभा की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी।
पंचायतों, नगर पालिकाओं और महानगर पालिकाओं में पहले से ही 33 प्रतिशत रिजर्वेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने रिजर्वेशन
के प्रतिशत में इजाफे का एलान किया है। इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की घोषणा अशोक चव्हाण ने मुख्यमंत्री रहते की गई थी।
भविष्य में स्त्री-पुरुषों के अनुपात में कमी और आरक्षण 50 से भी बढ़ाने की मांग की गई तो एक दिन शतप्रतिशत महिलाओं को
आरक्षण होगा तो पुरुष क्या करेंगे? सभी जगह महिला राज कायम होने के बाद फिर पुरुषों की तरफ से महिलाओं से आरक्षण की
मांग करेंगे। सौ फीसदी महिला आरक्षण के बाद अजीबो-गरीब बदलाव दिखेंगे।
नारी कंकाल मिले-
स्त्री सत्ता के कायम होने के बाद समाचार पत्रों में पुरुष प्रधान शब्दावली को भी बदला जाएगा। तब यदि कोई निठारी
जैसा कांड होगा तो अखबार की हेडलाइन इस तरह से होगी- निठारी में नारी कंकाल मिले।
बाप का नाम ऐच्छिक-
बच्चों के नाम के बाद हर जगह मां का नाम लिखना अनिवार्य होगा। सरकारी आवेदनों में किसी एक कोने में एक कालम होगा
जहां बाप का नाम लिखा जाना ऐच्छिक होगा।
पिचक जाएंगी पिचकारियां-
होली पर रंग की पिचकारियां मारने का काम महिलाएं करेंगी और पुरुषों की पिचकारियां हमेशा के लिए पिचक जाएंगी।
हैंडसम और माचो सेक्रे टरी-
दफ्तरों में सभी जगह महिला बॉस होंगी। हैंडसम और माचो टाइप के युवा सेक्रे टरी होंगे। पुष्पगुच्छ या गुलाब देने पर प्रतिबंध होगा।
महिलाएं गोभी का फूल दे कर पुरुषों को फ्लर्ट करेंगी। यह फल गृहणों को किचन में काम आएगा।
पुरुषों के लिए रिजर्व-
महानगरों कुछ लोकल मेल स्पेशल होंगी। बकी ट्रेनों में कुछ डिब्बे पुरुषों के लिए रिजर्व होंगे। मेल ट्रेन मे कूपे की छह बर्थ
पुरुषों के लिए रिजर्व होंगी।
धर्म की ठेकेदारनी -
पूजा,अर्चना और इबादत करवाकर वे भी धर्म की ठेकेदारनी कहलाएंगी। फिलहाल उन्हें इस अधिकार से वंचित रखा
गया है। देवदासियों की जगह देवदास होंगे।
बाप और भाई की गालियां-
सभी पुलिस स्टेशन महिलाओं के कब्जे में होंगे और पुरुषों की सुनवाई करने के लिए अलग से पुलिस स्टेशन होंगे।
रफटफ दिखने वाली पुलिसवालियां पुरुषों को जो गालियां देंगी उनमें कुत्ता, कमीना जैसे शब्द सामान्य होंगे।
तेरी मां की... तेरी बहन की... जैसी गालियों में से मां-बहन के नाम की जगह बाप और भाई के नाम जुड़ जाएंगे।
जो गालियां दी जाएंगी उन्हें यहां लिखना संभव नहीं है।
बहू की जगह बहूरूपिया-
किन्नर शब्द डिक्शनरी से हटा दिया जाएगा। ऐसे लोगों को पूरी तरह से स्त्री मान लिया जाएगा।
भ्रूण जल परीक्षण में लड़का होने पर अबोर्शन करा दिया जाएगा।
घर परिवार में लड़की के पैदा होने पर लड्डू बांटे जाएंगे। जाहिर है घर की मुखिया भी महिला होगी। लड़कों की जगह लड़कियों की
बारात जाएगी। बहू की जगह बहूरूपिया ब्याह कर लाया जाएगा। डोली की जगह डोला होगा।
राष्ट्रपति की जगह राष्ट्रपत्नी-
संवैधानिक पदों के नाम भी नए सिरे से लिखे जाएंगे। राज्यपाल को राज्यपालिनी के नाम से पुकारा जाएगा
और राष्ट्रपति की जगह राष्ट्रपत्नी लिखा जाएगा।
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