लाठी लाठी पर लिखा है खाने वाले का नाम
बहुत पुरानी कहावत है-जिसकी लाठी उसकी भैंस। भैंस तो पानी में चली गई बची सिर्फ लाठी बची है जिसे देशभर में खूब
भांजी जा रही है।
सत्ता की लाठी-
यह लाठी अजादी से पहले भी खूब चली और अब भी चल रही है। उम्मीद थी कि अंग्रेज इसे अपने साथ लेकर जाएेंगे लेकिन अंग्रेज
चले गए, लाठी छोड़ गए।
पैसों की लाठी-
इस लाठी से कुछ भी काम करवाए जा सकते हैं। यह लाठी वास्तव में जादुई है। यह अनहोनी को होनी में बदल
देती है। इसकी मार से दफ्तर में पड़ी फाइल की धूल तुरंत झड़ जाती है।
संगठन की लाठी-
जिस लाठी से गांधीजी अंग्रेजों को मार भगाया उसी लाठी से अब गांधीजी को विलायत पहुंचा दिया है।
अब देश में कम विदेशों में उनके विचारों और प्रतिमाओं को स्थापित किया जा रहा है।
धर्म की लाठी-
यह लाठी दुनियाभर में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पड़ रही है। यह लाठी इतनी मजबूत है कि टूटने का नाम नहीं
ले रही है। जिस तरह से तेल पिलाने से लाठी मजबूत होती है उसी तरह खून पी पी कर धर्म की लाठी दिन प्रतिदिन मजबूत
होती जा रही है।
बुजुर्ग की लाठी-
यह लाठी अनुभवों मजबूत होती है। जिसे पड़ जाए उसका जीवन संवर जाए। समस्या यह है कि इस लाठी
को अब शहरी लोग घर में रखना कम ही पसंद करते हैं। आश्रमों में फेंक कर इसे सड़ने पर मजबूर कर दिया जाता है।
ईश्वर की लाठी-
यह लाठी सबसे लंबी होती है। कहते हैं इस लाठी में आवाज नहीं होती है। जिसे पड़ती है वही इसकी आवाज सुन सकता है
और समझ सकता है। इन्साफ न मिलने पर देश के कई मजलूम इसे जालिमों पर पड़ने का इंतजार करते हैं।
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